छायावाद

हिंदी में छायावाद हिंदी के विकास के क्रम में छायावाद का विकास द्विवेदी जी के कविता के पश्चात हुआ। अगर मोटे तौर पर देखे तो छायावादी काव्य की सीमा 1928 ई. से 1996 ई.तक मानी जा सकती है। छाया वाद के संदर्भ में आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने कहा है , ” छायावाद शब्द का अर्थContinue reading “छायावाद”