दर्द से रिश्ता

अब दर्द का दर्द से रिश्ता बन रहा है। तेरा यूं नजर चुराना मेरे दर्द का सबब बन रहा है। दिन हो या रात हो बस तेरी ही बात हो। डूब के दर्द में दर्द से ही इश्क करने लगा हूं। ये मेरे दिल का भ्रम है या सचमुच तुम हो। मेरी बातों का होContinue reading “दर्द से रिश्ता”

रिश्ता

जाने क्या बात थी कुछ दिनों से उसने बात करना तो दूर की बात , मेरे तरफ देखना भी बंद कर दी थी। मैं उसके इस बेरुखी से बहुत परेशान था , की मैंने आखिर क्या कह दिया , मेरे किस बात ने उसको चोट पंहुचाई है। जिनको कल तक बात किए बिना चैन नाContinue reading “रिश्ता”