वक्त का उल्लू

वक्त का उल्लू देख रहा है, तू जो जज्बातों से खेल रहा हैरात घनेरा दिन का राही , क्यों तू आंखे खोल रहा है, वक्त का उल्लू देख रहा है। तेरी करनी तेरी भरनी, क्यों तू बीच में डोल रहा है। वक्त का उल्लू देख रहा है। रात दिन का रैन बसेराये जो दिल खिलौनाContinue reading “वक्त का उल्लू”

ऐसा सुबह कहां से लाऊं

अच्छे नहीं हालात दिल के क्या जुगत लगाऊंकैसे हो मिलन मनवीरक्या क्या तौफे लाऊं। जी के जिंदगी अपनी ना हुईतो क्या मौत को गले लगाऊं। सुंदर वचन , सुंदर चितवनतो क्या सुंदरता का राग अलापुरात और दिन का हो मिलन ऐसा सुबह कहां से लाऊं

उलझन

क्या लिखूं ए दिल…., है बड़ी मुश्किल रात दिन के बात में उलझन बनीदिन निकलता नहीं रात जाती नहीं इश्क सी हो गई है अंधेरों सेहम तो दिन को भी रात समझते हैं क्या लिखूं ए दिल…. ,है बड़ी मुश्किल। बात कुछ भी नही,बड़ी बात हैबात कुछ भी नही,बड़ी बात है। ये समझ के नाContinue reading “उलझन”

ख़ामोश जिन्दगी

क्यूं खामोश है जिन्दगी ,     क्या बात है? हर बात में ठंडी आहें,     क्या बात है? रात को तारें गिनना,    गिनकर यूं मुस्कुराना,          क्या बात है? राह चलते – चलते यूं गिर पड़ना,        गिर कर फिर संभल जाना,                क्या बात है? जुबां से कोई बात नहीं निकलती,        दिल के अरमान दबा के बैठे हैं,                Continue reading “ख़ामोश जिन्दगी”