साथ चल रहा हूं

ऐ वक्त तेरे साथ चलने को भरसक कोशिश कर रहा हूं ऐसा लगता है कभी तू आगे और कभी मैं आगे निकल रहा हूं। तू मेरे साथ है यही सोच के कभी तन्हा कभी महफ़िल कभी कारवां के साथ निकल रहा हूं। तेरे साथ कदम से कदम मिला कर चलने में अब अंधेरों को भीContinue reading “साथ चल रहा हूं”