मनवीर के दोहे

आदर सब जगह होत है ज्ञानी गुनी और संत। अज्ञानी बन ज्ञान पा संतो के सानिध्य में विपतकाल जब आएगा, बिना ज्ञान तू पार ना हो पाएगा। परमानंद आनंद है संत के संगत में मनवीर रहा सोवत वहां तो कैसे मिले परमानंद। राही ये संसार है रहता है राहों पर, चलना है तो चलो राही,Continue reading “मनवीर के दोहे”