वक्त का उल्लू

वक्त का उल्लू देख रहा है, तू जो जज्बातों से खेल रहा हैरात घनेरा दिन का राही , क्यों तू आंखे खोल रहा है, वक्त का उल्लू देख रहा है। तेरी करनी तेरी भरनी, क्यों तू बीच में डोल रहा है। वक्त का उल्लू देख रहा है। रात दिन का रैन बसेराये जो दिल खिलौनाContinue reading “वक्त का उल्लू”

ऐसा सुबह कहां से लाऊं

अच्छे नहीं हालात दिल के क्या जुगत लगाऊंकैसे हो मिलन मनवीरक्या क्या तौफे लाऊं। जी के जिंदगी अपनी ना हुईतो क्या मौत को गले लगाऊं। सुंदर वचन , सुंदर चितवनतो क्या सुंदरता का राग अलापुरात और दिन का हो मिलन ऐसा सुबह कहां से लाऊं

उलझन

क्या लिखूं ए दिल…., है बड़ी मुश्किल रात दिन के बात में उलझन बनीदिन निकलता नहीं रात जाती नहीं इश्क सी हो गई है अंधेरों सेहम तो दिन को भी रात समझते हैं क्या लिखूं ए दिल…. ,है बड़ी मुश्किल। बात कुछ भी नही,बड़ी बात हैबात कुछ भी नही,बड़ी बात है। ये समझ के नाContinue reading “उलझन”

मेरी आवारगी मेरा निक्कमापन

मेरी आवारगी और मेरा निक्कमापन यारों ये अब फितरत सी हो गई लगती है। उनकी गलियों का चक्कर , यारों किस्मत सी हो गई लगती है। जो भी देखता आवारा समझता है, क्या आपने भी आवारा समझ लिया । आपके खातिर ही ये फितरत बनी, आप की चाहत ने ही निक्कमा किया। शायद किसी दिनContinue reading “मेरी आवारगी मेरा निक्कमापन”

मदद

मैं बस में चढ़ गया। अंदर भीड़ देखकर मैं परेशान हो गया। बैठने की जगह नहीं थी। तभी, एक व्यक्ति ने अपनी सीट खाली कर दी। खाली सीट के बगल में खड़ा आदमी वहाँ बैठ सकता था, लेकिन इसके बजाय उसने मुझे सीट की पेशकश की। अगले पड़ाव पर फिर वही काम हुआ। उसने अपनीContinue reading “मदद”