ख़ामोश जिन्दगी

क्यूं खामोश है जिन्दगी ,     क्या बात है? हर बात में ठंडी आहें,     क्या बात है? रात को तारें गिनना,    गिनकर यूं मुस्कुराना,          क्या बात है? राह चलते – चलते यूं गिर पड़ना,        गिर कर फिर संभल जाना,                क्या बात है? जुबां से कोई बात नहीं निकलती,        दिल के अरमान दबा के बैठे हैं,                Continue reading “ख़ामोश जिन्दगी”

जिन्दगी

जिन्दगी के इस इम्तहान में कौन जीतेगा कौन हारेगा? पर मजा तो उसे ही आएगा जो किनारे पे बैठ के देखेगा। रोक लो खुद को कुछ भी कहने से पहले, आज उसकी तो कल तेरी भी आनी है। जिन्दगी में सब्र का क्या मोल है, ये तो उसी को पता है ,जिसने सब्र कर रखाContinue reading “जिन्दगी”