ख़ामोश जिन्दगी

क्यूं खामोश है जिन्दगी ,     क्या बात है? हर बात में ठंडी आहें,     क्या बात है? रात को तारें गिनना,    गिनकर यूं मुस्कुराना,          क्या बात है? राह चलते – चलते यूं गिर पड़ना,        गिर कर फिर संभल जाना,                क्या बात है? जुबां से कोई बात नहीं निकलती,        दिल के अरमान दबा के बैठे हैं,                Continue reading “ख़ामोश जिन्दगी”

मझधार

क्या लिखूं ए जिन्दगीमझधार में हूंदिल को तलाश हैबेकरार भी हूं।दिल अनजान है,उदास भी हूं।कभी कभी तो ऐसा सोचता हूं।बदल दूं अपनी फितरत को पर,कुछ ही पलों में फितरत अपना रंग दिखाता है, औरमैं फिर से मैं हो जाता हूं। कभी कभी राज से पर्दा हटते हटते, राज और गहरा हो जाता है ।हमको लगताContinue reading “मझधार”

मैं क्या कर सकता हूं?

स्वतंत्रता दिवस की अग्रिम शुभकामना के साथ ए मातृभूमि तेरे लिए मैं क्या कर सकता हूं, तेरे उपकारों का, क्या मैं बदला चुका सकता हूं? मां मेरी मुझे इक मौका दे, तेरे लिए मां अपनी शीश कटा सकता हूं। ए मातृभूमि तेरे लिए मैं क्या कर सकता हूं? तेरे उपकारों का ,क्या मैं बदला चुकाContinue reading “मैं क्या कर सकता हूं?”