अबोध

अल्प ज्ञानी ,कुछ ना मानी।कुछ सही कुछ ग़लत पैमानी।। ना दिन ना रात जानि।अल्प बोधी वयक्त अभिमानी।। शोभा सुंदर की बात बेईमानी।अक्खर पक्कर सब सहानी।। तृष्णा कृष्णा घोर माया। ना ममता ना देही काया।। रस रंग सब उपज की खानी।मन में बसे दिल में नाही।दिल में बसे सब जगह पांही।।। अनहद नाद सुवाद सबे ओर।जिनContinue reading “अबोध”