अंतकाल

जब उम्र बिता भाई तब जाके अकल आई। क्या खोया क्या पाया क्या सारी उम्र गंवाया। आज तुझे पता चला तेरी हैसियत कुछ नहीं। जब आई हलक में जान तब तुझे ,सुझे आसमान। तुझे दिया जिन्दगी तू समझा दिल्लगी। कोई खेल में लागा कोई मौज में लागा। जब आई तेरी बारी तू होश में जागा।Continue reading “अंतकाल”