कर्मरथ

वक्त पर मत छोड़ बंदे,
अपने भविष्य को ।
तू कर्म कर ,ना तू शर्म कर,
तू देख बस लोकहित,
मन में सेवाभाव हो।

वक्त पर मत छोड़ बंदे,
अपने भविष्य को ।

तू शब्दभेदी तीर बन,
तू कर्म कर तू धिर बन।
तू बहते अश्क पोंछ डाल,
तू सत्कर्म रूपी बीज डाल,
तू आस्तिक बन, तू नास्तिक बन।

वक्त पर मत छोड़ बंदे,
अपने भविष्य को ।

तेरे कर्म से तेरा भविष्य है,
तू कर्म पथ पर चलता रह।
तेरे नाम से जग को प्रकाश मिले,
तेरे कर्म से नया आयाम मिले।

वक्त पर मत छोड़ बंदे,
अपने भविष्य को ।

तेरे द्वारा होना है, इस युग का भला।
तू चाहे तो बदल सकता है,

अपने जीवन की दशा।
वक्त के अंदर छिपा है ,

भविष्य तेरा,
तू मत देख बंदे कैसा है,
भविष्य तेरा।
तू निर्माता बन अपने भविष्य का,
तू कर्मवीर ,

तू रणवीर ,

तू धैर्यवान बन,
तू निर्माण कर स्वर्णिम युग का।

वक्त पर मत छोड़ बंदे,
अपने भविष्य को ।

लोगों की बातों पर ना ध्यान दे,

बस अपने कर्मो को ही मान दे,

सत्य से बस रख वास्ता।

वक्त पर मत छोड़ बंदे,
अपने भविष्य को।

तेरे कर्म से तेरा भविष्य है,
तू कर्म पथ पर चलता रह।
तेरे नाम से जग को प्रकाश मिले,
तेरे कर्म से नया आयाम मिले।

वक्त पर मत छोड़ बंदे,
अपने भविष्य को ।

तेरे द्वारा होना है,

इस युग का भला।
तू चाहे तो बदल सकता है,

अपने जीवन की दशा।
तू निर्माण कर स्वर्णिम युग का,
तेरे कर्म पे तेरा भविष्य टिका।

कर्म रथ पर हो सवार ,

तू जीत ले संसार को।

कुछ ऐसा करके जा बंदे,

वक्त को तू नहीं,

वक्त तेरा इंतजार करे।

वक्त पर मत छोड़ बंदे,
अपने भविष्य को ।

गुजर जाता है।

वक्त कैसा भी हो,

कुछ पल में गुजर जाता है।
जख्म कैसा भी हो ,

वक्त हर जख्म को भर देता है

मर्ज कैसा भी हो,

वक्त हर दर्द को हर लेता है।

नादानी कितनी भी हो,

वक्त हर चीज सीखा देती है।

वक्त कैसा भी हो,

कुछ पल में गुजर जाता है।

दिल के दर्द हो चाहे हो कोई बेरुखी,

वक्त हर लम्हा छुपा लेता है ।

वक्त कैसा भी हो,

कुछ पल में गुजर जाता है।

इंतजार कैसा भी हो ,

वक्त हर चीज मिला देता है।

वक्त कैसा भी हो ,

कुछ पल में गुजर जाता है।

रात कैसा भी हो,

वक्त हर रात की सुबह लाता है।

दाग़ कितने भी हो,

वक्त हर दाग़ मिटा देता है।

वक्त कैसा भी हो,

कुछ पल में गुजर जाता है।

जिन्दगी में हो चाहे लाखों तुफां,

वक्त हर तुफां दबा देता है।

जख्म कैसा भी हो,

वक्त हर जख्म भर देता है

समय के नदी हर चीज बहा ले जाती है।

वक्त कैसा भी हो,

कुछ पल में गुजर जाता है ।

अपनापन

।कोई बांझ तो कोई कुलटा और कोई अभागी कहकर बुलाती थी।कोई कहती सुबह सुबह किसका मुंह देख लिया,आज तो पूरा दिन ही खराब जाएगा।
घर से निकलना मुश्किल कर दिया था,किसी भी वजह से घर से बाहर जाना होता तो सबसे बचके निकलती ,फिर भी कोई ना कोई टकरा ही जाती और उसको ताना सुनना पड़ता इसलिए वह घर से ना ही निकलती थी।
अचानक क्या हुआ ऐसा की समाज के रंग बदल गए?

शादी के करीब दस सालों के बाद उसके घर में किलकारी गूंजी
उसके घर एक सुंदर बच्चे का जन्म हुआ, आखिरकार भगवान ने उसकी और उसके परिवार की सुन ली।
बच्चे के जन्म से पूरा परिवार खुश था।
मां तो अपने बच्चे को देख -देख कर निहाल हो रही थी ।
बीच बीच में उसे अपना बिता हुआ कल भी याद आ जाता था
इक पल में अभी मिली खुशी के आंसू और दूसरे पल में पीछे हुए दुखों के याद में आंसू,
ये आंसू थे कि रुकने का नाम नहीं ले रहे थे, पूरा परिवार उसको चुप कराने में लगा था। कभी कभी पूरा परिवार उसके साथ रोने लगता था ।अपने पूरे परिवार को रोता देख उसने अपने आप को किसी तरह चुप किया । और अपने परिवार के बारे में सोचने लगी ।आज अगर उसका परिवार उसके साथ नहीं होता तो वह मर गई रहती समाज के तानों से उसने कई बार अपने आप को मारने की कोशिश की
उसके परिवार ने उसको बार बार समझा कर उसको अपनेपन का अहसास कराया और उसको हिम्मत दिया। और इसलिए आज सभी लोग उसे बधाई दे रहे थे। जो कल तक ताना मारते थे ,वो भी आज घर आकर बधाईयां दे गए

प्रेरणा :-१) धैर्य हर परिस्थिति में रखना जरूरी है।

२) समाज का क्या है अगर आप कुछ करते हो तो भी बोलेंगे,
और कुछ नहीं करोगे तब भी बोलेंगे। समाज को तो बस समझने की देरी है ।अगर आप गलत करते हो तो भी बोलेंगे ,अगर आप सही करते हो तो भी बोलेंगे ,अगर आप कुछ अचीव करोगे तो सेलिब्रेट करने भी आएंगे।नहीं बुलाओगे तो भी बोलेंगे ,बुलाओगे तो भी बोलेंगे।

३) परिस्थिति कैसा भी हो परिवार अगर साथ दे तो किसी भी मुसीबत से पार पाया जा सकता है।

उन्हें क्या पता

तेरे दर्द से परेसां हूं मैं !

ऐसा लगता है कि बिमार हूं मैं!!

मेरी खामोशी का मतलब ना निकालना!

तुम्हे क्या पता,

मतलब निकालने में माहिर हूं मैं!!

तुम्हे पसंद नहीं मेरा आना!

पर तुम्हे क्या पता ,

घर से भागने में माहिर हूं मैं!!

यूं ना दिल जलाओ मेरा !

तुम्हे क्या पता,

परवाना , जलने में माहिर हूं मैं !!

मैंने जब भी तुम्हे देखा तुम मुस्कुराने लगी !

तुम्हे क्या पता,

सपने सजाने में माहिर हूं मैं!!

दर्द उठता है तेरे जाने के नाम से!

तुम्हे क्या पता,

दर्द छुपाने में माहिर हूं मैं!!

अक्सर डराते है लोग मुझे प्यार के नाम से!

उन्हें क्या पता ,

धोखा खाने में माहिर हूं मैं!!

रातों के अंधेरे में अक्सर खोजता हूं चांद को !

आपको क्या पता,

अंधेरों में खोजने में माहिर हूं मैं!!

अक्सर चलते चलते रुक जाता हूं मैं!

,तुम्हे क्या पता,

मन ही मन योजना बनाने में माहिर हूं मैं !!

मुझे डराते है , वही जो डरपोक हैं!

उन्हें क्या पता ,

पेड़ की पत्तियां तोड़ने से भी डरता हूं मैं !!

अक्सर मेरा मुकाबला होता है मुझसे !

मुझे ही है पता है,

कि मेरे मैं से लड़ता रहता हूं मैं!!

दिल के जज़्बात से अक्सर हार जाता हूं मैं!

दिल को क्या पता,

उनसे कितना प्यार करता हूं मैं!!

मैं अक्सर सीधा चलने की कोशिश करता हूं!

पांव को क्या पता,

रास्ते है की अक्सर मूड़ जाते हैं!!

मां

तेरी बातें तेरा प्यार मां मैं न भुला पाता हूं,
अकसर अकेले में छुप- छुप के रोता रहता हूं।
तू है तो जहां मेरे लिए बस खेला है
तू नहीं तो ये दुनियादारी झमेला है।
तेरे रहने से ना जाने कहां से आती है इतनी ताकत !
तेरे इक जाने के अहसास से खुद को अकेला पाता हूं।
तेरी बातें तेरा प्यार मां मैं न भुला पाता हूं।
अकसर अकेले में छुप -छुप के रोता रहता हूं।
मेरे इक जिद के लिए ,
अपने वर्षों के जमा पूंजी को एक पल में लुटाती हो ।
मां मैं कितना भी बड़ा क्यों न हो जाऊं ,तेरे लिए तो तेरा छोटा बच्चा हूं।
तेरी बातें तेरा प्यार मां मैं न भुला पाता हूं।
अकसर अकेले में छुप- छुप के रोता रहता हूं।

परछाई

ढलते सूरज को देखती है और वो फिर चलने लगती है ,उसके चाल में अजब खामोशी और तेजी है। अपने बच्चे को गोद में उठाए पसीने से लथपथ चली जा रही है।कभी अपने छोटे बच्चे को गोदी में संभालती और कभी अपने आंचल से पसीने को पोछती और फिर तेजी से चलने लगती ।
अचानक किसी ने पीछे से आवाज लगाई , मां उफ्फ! धीरे धीरे चलो न, मैं इतना तेज नहीं चल पा रहीं हूं।
मां ने उसकी बात को अनसुना किया और तेजी से आगे बढ़ने लगी ,उसके पीछे बच्ची जो सही से चल नहीं पा रही थी। मां की तेजी देख कर वह उसके पीछे दौड़ने लगी।

चाहत

अब आसमां की चाहत भी पूरी हो गई,

अब आसमां की चाहत भी पूरी हो गई,
उस देखना था जो ये हंसी जहां।
उसके किस्मत में था हर दिन दीदार लिखा,
लेकिन तूने तो उसे उसके किस्मत से दूर कर दिया।अब जाके इक बार फिर से उस की दुआ रंग लाई
अब जाके इक बार फिर से उस की दुआ रंग लाई ।जिसने तेरे चेहरे की रंगत उड़ाई
तू अब कैद में है और वो मौज में है।
तेरी लालसा ही तेरा काल बन गया है,
और तू देख इस जहां को कितनी बेहतरीन बन गई है।
जिसके चेहरे पर कभी झुर्रियां थी
वही अब कितनी हसीन बन गई है।
रात का दीदार ना रात को होता था,
रात के वो तारे जिन्हें सब भूल सा गए थे,
आज अचानक प्रकट हो गए है।
जिनकी आवाज सुनने को कान तरस गए थे,
आज उनकी आवाज सब सुन रहे है।
आज अधूरी ख्वाहिशें पूरी हो रही है,
जो समझ रहे थे कल तक अपने आपको खुदा !
आज वो भी सहम रहें है,
आज वो भी सहम रहें है।अब जाके इक बार फिर से उस की दुआ रंग लाई,अब जाके इक बार फिर से उस की दुआ रंग लाई।

मत देख इधर

मत देख इधर
मत देख इधर ए वक्त सफर
मैं तेरे साथ ही तो हूं।
तू वक्त का दरिया है और मैं नाव ही तो हूं।
तेरे साथ ही मेरी जिंदगी है ,तेरे बिना तो मैं कुछ भी नहीं।
तुमको लगता है मैं किनारे से निकल जाऊंगा,
जब की तेरे बिना मेरा कोई अस्तित्व नहीं।
मत देख इधर ए वक्त सफर,
मैं तेरे साथ ही तो हूं।
जब तुमको लगता है मैं तेरे से आगे निकल जाऊंगा,
तो ऐसा है की मैं आगे जाकर भी कहां जाऊंगा।
मुझको रहना है, तेरे साथ ही
क्योंकि तू है, तो मैं हूं।
मत देख इधर ए वक्त सफर
मैं तेरे साथ ही तो हूं।
तेरे अंत खोजने में में खुद अंत हो जाता हूं,
इसलिए तो तेरे इस अंतहीन यात्रा पर खुद को तुझ से घिरा पाता हूं।
तेरे से मैं अलग नहीं ,ना कभी अलग हो पाता हूं।
मत देख इधर ए वक्त सफर
मैं तेरे साथ ही तो हूं।
लोग कहते हैं हमेशा वक्त के साथ चल,लेकिन कौन है वो जो बिना वक्त के चलता है।
वक्त वो दरिया है जिसमें सबको बहना है ,इसी के साथ तो मिलती है सबको मंजिलें।
और जो कहता है कि वक्त से हमेशा आगे रह,
तो क्या आगे वक्त नहीं ।
मत देख इधर ए वक्त सफर
मैं तेरे साथ ही तो हूं।

अंतरिक्ष के जीव

ये कहानी एक छोटे बच्चे की जिसका जन्म अंतरिक्ष की गहराइयों में हुआ ।

क्या आप जानना चाहेंगे उस अंतरिक्ष में जन्मे बच्चे के बारे में ?

जब धरती के सारे वैज्ञानिक अंतरिक्ष में घर बनाने के लिए होड़ लगा रहे थे।और कई देशों ने तो देखते- देखते अंतरिक्ष में, अपना अपना स्टेशन बना कर वहां रिसर्च भी शुरू कर दिया था।
उस में से कुछ वैज्ञानिक ऐसे भी थे जो ये प्रयोग कर रहे थे कि
बिना किसी आवरण के हम अंतरिक्ष में कैसे रह सकते है।
मगर हर बार उसे असफलता ही हाथ आई, और साथ ही इसमें कई आदमियों का बलिदान भी देना पड़ा।
हर बार के असफलता से परेशान होकर उस अभियान को चलाने वाली संस्थाओं ने पैसा देना बंद कर दिया । जब इसका पैसा आना बंद हो गया तब वैज्ञानिकों को अंतरिक्ष में रहकर ये प्रयोग करना कठिन हो गया ।

अभी तक धरती से गए जितने भी प्रयोग हेतु वस्तु थे, लगभग सभी का उपयोग किया जा चुका था ।
उसमें से कुछ पदार्थ बचे थे।
अब जब की वैज्ञानिकों को अंतरिक्ष छोड़ने में अब कुछ दिन ही शेष बचे थे। और सभी धरती पर जाने की तैयारी में लगे थे।लेकिन , एक वैज्ञानिक ऐसा भी था जो लगातार अपने काम में लगा था।और उसके हाथ कुछ ऐसी सफलता लगी, जिससे वह खुश हो गया। और अपनी योजना सब को बताने के लिए तैयारी करने लगा ।रवि नाम के उस वैज्ञानिक ने अपनी योजना बताने के लिए, उसने उस अंतरिक्ष के प्रयोगशाला में मौजूद सभी वैज्ञानिकों की आपात बैठक बुलाई और अपनी योजना को विस्तार पूर्वक बताया ।ये योजना कुछ इस प्रकार का था -: की हम सब मिलकर एक ऐसा ट्यूब बनाएंगे जिसमें बच्चा पल सके और इसका जन्म इसी अंतरिक्ष में हो ।
साथ ही इसके शरीर निर्माण में अंतरिक्ष के पदार्थ के साथ धरती के पदार्थ को मिलाकर किया जाए । सभी वैज्ञानिक उसकी बात ध्यान से सुन रहे थे ।
उसने आगे बताना शुरू किया कि एक वैज्ञानिक ने कहा कि,” हम वो अंतरिक्ष का पदार्थ कहां से लाएंगे?”
इस बात पर उस वैज्ञानिक ने जबाव दिया, मैंने कुछ पदार्थ यहां के वातावरण से तैयार किया है ।कुछ यहां के आस पास मिलने वाले पत्थरों से निकाला है।
इतने पर दूसरे वैज्ञानिक ने पूछा, “इतने काम इतने कम दिन में कैसे कर पाएंगे,और जब की ये काम अब बंद हो गया है तो इसको हम कैसे आगे बढ़ाएंगे और भविष्य में इसका मॉनिटर हम कैसे कर पाएंगे?”
इस बात पर उस वैज्ञानिक ने जबाव दिया, ये सारी बातें हम लोगों के मध्य ही रहेंगी ,और हम इसका भेद तब तक नहीं खोलेंगे।
जब तक ये योजना सफल नहीं हो जाती ।और इसका मॉनिटर हम धरती से गुपचुप तरीके से करेंगे।
और अब रही बात इसको सब के नजर से बचाने की तो हम इसको एक ऐसे जगह पर इंस्टाल करेंगे जो ये सब के नजर से बचा रहे और अपना काम भी होता रहे।
और हम इसको ऐसे सेट करेंगे की ये बाहर से खुल सके ऑटोमैटिक हो अगर हम लोग इसको कमांड नहीं भी दे तो भी ये अपना काम करता रहे और इसको हम कम से कम चार साल के लिए कमांड दे कर रखेंगे।
और जब जरूरत होगा तब इसको धरती से कमांड देंगे, और अन्य जानकारी उस योजना से सम्बन्धित सभी को समझाने लगा।
सभी कुछ समझने के बाद सब अपने अपने कार्य में लग गए ।
बहुत हद तक कार्य , रवि ने पहले ही कर दिया था ,जब सारा system तैयार हो गया । उसको उस अंतरिक्ष यान के एक ऐसे हिस्से में सेट किया गया कि वह किसी के नजर में ना आए ,और उसकी एनर्जी ,पॉवर संबंधित आवश्यकता भी पूरी होता रहे ।साथ ही जब जरूरत हो ,उसको बाहर लाने का,तब बाहर लाया जा सके। उसी मशीन के अंदर
उसके पालन पोषण का सारा व्यवस्था किया गया था,मशीन ऐसा सिस्टम इंस्टाल किया गया कि ,
उसके अंदर हो रही पल पल की गतिविधि का पता उसको चलता रहे।
अब आखिर जाने का दिन आ ही गया ,जाने से पहले एक बार सभी ने जाके अपना अपना सिस्टम चेक किया । सभी सिस्टम सही से कार्य कर रहे थे ,अब सभी धरती पर जाने के लिए सभी जाके अपने यान में बैठ गए और धरती की ओर रवाना हो गए ।

धरती पर लौटने के करीब एक साल के बाद
अचानक एक दिन उन सब के द्वारा जो सिस्टम सेट किया गया था उसमे हलचल तेज हो गई।
अचानक हुई इस हलचल से उस ग्रुप के सारे सदस्य सक्रिय हो गए।
अब इंतजार था उस system के सही से कार्य करते रहने का ,साथ उन सब को ये आश्चर्य हो रहा था कि हलचल तो है लेकिन,बच्चा अभी तक पूर्ण रूप से विकसित क्यों नहीं हुआ , ये इतना समय क्यों लगा रहा है । ये सोचने के अलावा और कर भी क्या सकते थे , इंतजार के अलावा कुछ कर भी नहीं सकते थे ।
क्योंकि,ये सारी गतिविधि गुप्त रूप से चल रही थी ,तो सावधानी रखना जरूरी था।
उस मशीन में हलचल लगातार हो रही थी मगर कुछ ज्यादा कहा नहीं जा सकता था ।
करीब दस महीने के बाद सबको ऐसा लगा, जैसे सिस्टम में बच्चा अब परिपक्व हो चुका है ,और सिस्टम से मैसेज आ रही बेबी ट्यूब ने आखिर उस बच्चे को जन्म दे ही दिया
और अब था टाइम बच्चे को खुले अंतरिक्ष में बिना किसी आवरण के निकालना ।
आखिर उस इंतजार का घड़ी खत्म हुआ और उस ऑटोमैटिक मशीन ने उसको बाहर निकाला कुछ सेकंड के लिए और फिर उसको अंदर ले लिया ।
अब तक बच्चा सही सलामत था ,
अब देखना था दूसरा चरण ।
दूसरे सप्ताह में बच्चे को मशीन ने फिर निकाला इस बार दो मिनट के लिए सबको अंदेशा था इस बार बच्चे को नुकसान होना ही है।
मगर ,दो मिनट के बाद बच्चे को मशीन फिर अंदर ले लिया ।
अब उस मिशन के सारे मेंबर को आखिर प्रयोग के उपर नजर था ।
इस बार का प्रयोग एक महीने के बाद होना था ।सारे सदस्य बेसब्री से इंतजार कर रहे थे।
की अचानक इस मिशन के सारे मेंबर एक्टिव है ये खबर खुफिया विभाग को पता चल गई ।
अब ये पता करना था कि ये सारे सदस्य आखिर इतने एक्टिव क्यों हो गए।
अब खुफिया विभाग के सारे सदस्य एक्टिव हो गए उनके फोन से लेकर मोबाइल कंप्यूटर उसके हर एक्शन पर नजर रखने लगे ।
इनको पता करने में ज्यादा समय नहीं लगा ।की ये सब किसी ऐसे मिशन पर काम कर रहे है ।जो समाप्त हो चुका है । और ये इसको गुपचुप तरीके से सब के नजर से बचा के कर रहे है।
ओर इन सबको दो चरण की सफलता भी मिल चुकी है ।
खुफिया विभाग के चीफ ने मिशन को जानने के बाद उसने उसका तीसरा चरण पूरा होने देने का आदेश दे दिया ,और उसके बाद ही
इसके बारे में सदस्यों से पूछताछ की कारवाही को आगे बढ़ाएंगे।
अब तीसरे चरण को पूरा होने में दो दिन ही बांकी था कि इस मिशन के बारे में कुछ न्यूज वहां के अपराधियों तक भी पहुंच गए।
और उस मिशन के एक सदस्य को छोड़ कर सारे सदस्य को अगवा कर लिया गया।
अब एक दिन मात्र शेष बचा था।
इस बार मशीन को पूरे 1/2 घंटे तक बच्चे को बाहर रखना था ।
मशीन ने सारे कार्य पूरे किए और बच्चे को बाहर निकाला और मशीन उसका लगातार मॉनिटर कर रहा था। समय धीरे धीरे गुजरता गया ।
ये 1/2घंटे भी सफलता पूर्वक पूरे हो गए । अब अंतिम जो था वो पूरे एक साल के बाद होने वाले प्रयोग थे।
तब तक ये सारे मिशन लिक हो गए । और सभी सदस्य तो पहले से ही अगवा कर लिए गए थे।
बस एक ही सदस्य बचा था । और उसके बारे में पता करना था।
उस मिशन के सारे डॉक्यूमेंट उसी के पास था , और वही एक था, जो सब के पकड़ से बाहर था । ना उसको खुफिया विभाग पकड़ पा रही थी,ना ही अपराधियों के हाथ आ रहा था।
ये खबर अब लगभग हर देश के खुफिया विभाग में पहुंच चुका था।
और ये न्यूज़ अब ट्रेंड में थी ।
सारे जहां के आतंकवादी इस न्यूज़ के आते ही एक्टिव हो गए।
पूरे विश्व में ये खबर फैल गई,की अब हम अंतरिक्ष में बिना किसी आवरण के रह सकते है।
इसका सारा प्रयोग सफल रहा,
पूरे विश्व में बस यही न्यूज़ चल रही थी ,और सब न्यूज़ को बढ़ाचढ़ा कर दिखा रहे थे।
इधर सभी उस आदमी को खोज रहे थे ,जिसके पास वो सारा डॉक्यूमेंट था इस प्रयोग से संबंधित।

रुक मत

हम चलते है बिना थके ,

कभी धूप में कभी छांव में ।

हम चलते है बिना थके,

कभी धूप में कभी छांव में

हमें रोकते ये जहां, हमें टोकते है ये जहां।
फिर भी हम चलते है बिना रुके,

कभी धूप में कभी छांव में।

कभी धूप में कभी छांव में।

क्योंकि भविष्य हमें है देख रहा
और है हमसे ये कह रहा
पथ पर कांटे हो चाहे लाख बिछे।
तू रुक जाना नहीं, तू झुक जाना नहीं।
तू संभल के चल ,तू देख के चल
क्योंकि तेरा जिन्दगी है चलना ।

इसलिए तो हम चलते है बिना थके

कभी धूप में कभी छांव में।

कभी धूप में कभी छांव में।

हमे रोकती है वक्त का ये फासला,
हमें रोकती है उम्र का ये सिलसिला।
हमें रोकोगी तुम भी कभी ना कभी,
क्योंकि तुम्हें डर है मेरे हारने का मेरे रुकने का।
और मुझे हौसला है जीतने का, और मुझे हौसला है जीतने का।
अरे तुम ही क्या ? मुझे रोकेगा ये वक्त भी ,
मुझे रोकेगा ये जहां भी ,
ऐसा होता है हर कर्मपथ पर चलने वाले के साथ भी।
मगर जो चलता रहता है वो है जीतता , मगर जो चलता रहता है वो है जीतता।

इसलिए हम चलते है बिना थके
कभी धूप में कभी छांव में,
कभी धूप में कभी छांव में।

जिन्दगी का धुंध ये जिन्दगी के मायने
हमें पता करते है जाना , हमें पता करते है जाना।
क्योंकि कब अंत हो मेरे पथ का
ये मैंने नहीं जाना ,क्योंकि कब अंत हो मेरे पथ का ये मैंने नहीं जाना ।
अभी तक मैंने जो है जाना रुक जाना है मर जाना और
खो जाना है उस बिराने में जहां से न है किसी का आना।
इसलिए हमको चलते जाना है ,
बस चलते जाना।
इसलिए हम चलते है बिना थके
कभी धूप में कभी छांव में ।

कभी धूप में कभी छांव में।

चाहे तेरे रास्ते में आये लाख तुफां,

चाहे तुझे झुकाने को ,तुझे अपने पथ से डिगाने को, आसमां ही क्यों न उतर जाए, तू रुकना नहीं तू झुकना नहीं ।
तेरे चलने पर ही तो है तेरा भविष्य टिका ,
जब तक तू चलेगा तेरा साथ देने हो सकता है कोई ना आए ,
मगर तेरे चले रास्ते पर हर कोई चलेगा ,
मगर तेरे चले रास्ते पर हर कोई चलेगा।

इसलिए हम चलते हैं बिना थके

कभी धूप में कभी छांव में।

कभी धूप में कभी छांव में।

नाव

नाव हिलती डुलती है पर मंजिल की ओर अग्रसर रहती है।

नाव हिलती डुलती है पर मंजिल की ओर अग्रसर रहती है।
पर पतवार किसी और के हाथ में
नाव के अंदर है सवारी बहुत पर मंजिल सब की एक है।
जाना है सबको उस पार,
मगर नाव का तो काम है ढोना
उसे किस बात का रोना ।
ना उसके अपने कोई, ना कोई पराया
ना कोई हमसफ़र, ना कोई साया
सारा संसार बस है माया,
नाव का तो काम है बिना रुके मंजिल तक पंहुचना ।
अगर नाव रुक गया तो रुक जाएगा उसके साथ बहुतों का सफर ।हो सकता है अंत हो जाए ये सफर सुहाना।
मगर नाव रुकता नहीं चलता रहता अपने पथ पर।
लहरें उसको डगमगाती है
कभी आगे कभी पीछे गिराती है
कभी जीतती है कभी हार जाती है।
पर अपने काम को छोड़ नहीं पाती है
नाविक जब थक कर सो जाता है नाव में वह धीरे धीरे उसको सहलाती है

सत्य की खोज

सत्य क्या है क्या सत्य ही ईश्वर है ? अगर सत्य ही ईश्वर है तो वो कौन सा सत्य है जिसको हम ईश्वर के रूप में मानते है ?

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सत्य छिपा है

नमस्कार दोस्तों

दोस्तों आज का जमाना जो कि पूर्णतः भ्रष्ट हो चुका है और इसको भ्रष्ट करने में हम सब की अहम भूमिका है ।इस तरह से एक बात और सामने आती है कि जो व्यक्ति जैसा है समाज में उसके आसपास वैसा ही व्यक्ति उसको मिलता है और जैसा सोचता है वह वैसा ही पाता है।

इसलिए अभी भी दुनिया में सत्य नाम की कोई चीज है ।जिस के बारे में लोग कहते है कि ये धरा सत्य पर टिकी है ।तो वो कौन सा सत्य है?
आज हम बात करेंगे सत्य के बारे और हम जानेंगे की सत्य क्या है ? सत्य के मायने क्या है ? क्या हम जिस सत्य को जानते हैं वही सत्य हमें ईश्वर के रूप में मिलता है ? वह कौन सा सत्य है ? क्या उसी सत्य को पा के परमात्मा को पाया जा सकता है?
क्या सत्य का भी कसौटी होता है ?
इन सब बातों पर ध्यान देने पर पता चलता है । सत्य की सत्यता क्या है ? सत्य को हम क्या मानते है ? सत्य मेरे लिए क्या है ।
और अब इस सब से आगे सत्य की परिकल्पना का आधार क्या है?
सत्य हम किसे मानते है ? क्या हम इसको सत्य मानते है किसी ने किसी के साथ ईमानदारी दिखाई ये पूरी जिंदगी में कोई असत्य कर्म नहीं किया ।या पूरी जिन्दगी जो वैष्णव रहा और किसी तरह के मांस आदि का सेवन नहीं किया। हम इसको ही सत्य मानते हैं ?अगर हां है तो इस तरह का
सत्य हर युग में बदलता है ।
सत्य हर परिस्थिति में बदलता है।
सत्य को हर आदमी अपने हिसाब से देखता है।
किसी ने कोई कर्म किया तो उसके लिए वो सत्य है और वही दूसरों के लिए गलत है ।
मानव सभ्यता के आरंभ में मनुष्य का खान पान कुछ और था तब वो शिकार करते थे और वही खाते थे ।जैसे जैसे मानव सभ्यता का विकास हुआ मानवों ने अन्न उपजाना शुरू किया और अन्न को खाने लगे ।समय के साथ खान पान बदला ।
रहन- सहन पहले लोग बिना कपड़ों के रहते थे जैसे जैसे मानव का सोच विकसित होता गया और सब कपड़ा पहनने लगे ।
उपर के दो बातों से ये बात निकल के सामने आती है कि जो बात एक समय सत्य थी वहीं बात दूसरे समय असत्य हो गई।

किसी आदमी या किसी जीव की हत्या करना असत्य है ।अगर वही अपनी रक्षा के लिए या अपने समाज अपने देश के लिए हम हत्या करते है तो वह सत्य है और हम इसको सत्य से तुलना करते है और वो अच्छी बात है ।तो सत्य का क्या हुआ ।किसी को दण्ड देना असत्य है ।मगर किसी को सुधारने के लिए दण्ड देना सत्य है। इसलिए उपर के सत्य को हम कसौटी पर परख सकते है और हर युग में ये सत्य बदलेगा और सत्य को उसी युग के हिसाब से परखा जाएगा ।तो हम सत्य किसे माने एक वो सत्य जो वक्त के साथ बदलता है या एक वो सत्य जो वक्त और समाज से परे है उसे ।
आदि समय से हमारे समाज के संत ,ऋषि मुनियों ने जिस सत्य को पाया वो क्या था ?
महात्मा बुद्ध ने जिसको पाया वो क्या था? वो कौन सा सत्य है जो सबसे छुपा है, और उसको पाने के लिए महात्मा बुद्ध को इतनी तपस्या करनी पड़ी ।इसी तरह कईयों ने पाया है। संत कबीर ने जिस सत्य के बारे में बताया वो क्या है ? विभिन्न तरह संप्रदाय ने सत्य को अपने हिसाब से परिभाषित किया है ।मगर आपने कौन से सत्य को देखा है माना है तो क्या इस सत्य को हम ईश्वर मान सकते है जो कि हर युग के साथ बदलता है तो क्या सत्य की ये परिभाषा उचित प्रतीत होती है?
तो सत्य की परिभाषा क्या है ?
जहां तक मैंने जाना है ईश्वर सत्य असत्य से ऊपर है । सत्य -असत्य इंसान ने अपनी जरूरत को पूरा करने के लिए बनाया है ।शुरू से ही मानव समूह में रहता आया है और इसी समूह से उसने समाज का निर्माण किया ।समाज को अनुशासित रखने के लिए और उसके उचित विकास के लिए उसने बहुत से नियमो को बनाया ।कुछ नियम वक्त के साथ अपने आप बनते गए ।जिसमें कुछ नियम बाध्यकारी थे जिसका पालन करना जरूरी था और कुछ नियम अबाध्यकारी थे।
ये सारे नियम कानून वह अपने समाज को सुरक्षित रखने के लिए और समाज को अनुशासित रखने के लिए ,उसके समाज के द्वारा बनाए गए नियम मात्र है। इसके अलावा बहुत सारे नियम जो वक्त के साथ बनते बिगड़ते गए जो हमारे अंदर घर कर गए ।वक्त के साथ साथ वही नियम हमारे लिए सत्य और असत्य के पर्याय बन गए और हम असली सत्य को भूलते गए । जिसको हम सत्य मानते है । ये सारे सत्य से ईश्वर की तुलना करना उचित नहीं लगता है।तो उचित सत्य क्या है ? क्या आप ने सत्य का अनुभव किया है ?क्या आप हमसे शेयर करेंगे? की सत्य क्या है सत्य के बारे में आपका अनुभव कैसा रहा है अभी तक और आपने अभी तक किसको सत्य माना है?
आपके अनुसार क्या सत्य ही ईश्वर है तो वह कौन सा सत्य है?सत्य की परिभाषा क्या है?
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धन्यवाद

अपना time आएगा

नमस्कार दोस्तोंअक्सर मैंने अपने आस पास अपने दोस्तों से ये कहते सुना है अपना टाइम आएगा ! ये अपना टाइम कब आएगा मेरे भाई!
जब हम बच्चे थे हमारी अलग ख्वाहिशें थी । छोटी -छोटी मगर बहुत सारी थी बहुत सारे पूरे हुए और बहुतों को भूल गया ।
जब थोड़ा और बड़े हुए मेरे देखने का नजरिया थोड़ा बदला और सपने भी बदले कुछ अपने थे कुछ लादे गए थे कुछ परिवार के द्वारा और कुछ समाज के द्वारा कुछ कहानियों और कुछ फिल्मों के द्वारा उसमे में भी कुछ पूरे हुए कुछ नहीं पूरे हुए और कुछ भूल गए ।
जब हम कुछ और बड़े हुए तो हमारे सपने बड़े हुए और इसके साथ ही हमारी सोच बड़ी हुई तब हम जवान थे और पूरी दुनिया को बदलने चले थे । अपनी ख्वाहिशों के तो कहने क्या मैं ये कर दूंगा मैं वो कर दूंगा ।
मैं ये खरीदूंगा मैं वो खरीदूंगा।
मैं यहां जाऊंगा मैं वहां जाऊंगा।
मैं ये काम करूंगा और मैं वो व्यापार करूंगा ।उफ्फ अपनी समझ से ज्यादा सोचना और करने के वक्त बिना किसी योजना के काम करना । फेल हो जाने पर अपने आपको कोसना और दूसरे काम में लग जाना
रात दिन केवल सपने सजाना और उन्हें पूरा नहीं करना ।ये बातें अक्सर आम आदमियों के जिंदगी में आती है । और जब वक्त बीत जाता है तब हम सभी को कोसते रहते है इसने मेरे लिए कुछ नहीं किया मेरे पिता ,माता परिवार,समाज ,देश ने मेरे लिए कुछ नहीं किया ।और हम दूसरे को देख देख कर जलते रहते है और उसके सपने पूरे होते देख अपने आपको किस्मत का दोष या पैसा का अभाव आदि का रोना रोतें रहतें है और उम्र भर हम अपने सपने को लेकर चलते हैं और कहते हैं अपना टाइम आएगा।
और ये टाइम कभी आता नहीं क्योंकि समय के साथ – साथ बहुत कुछ होता है जैसे शादी , बच्चे इससे हमारी जिम्मेदारी बढ़ती हैं और हम अपने सपने छोड़ कर बच्चों के सपने पूरे करने में लग जाते है तब भी हमको लगता है! अपना time आएगा क्योंकि अब हमें लगने लगता है कि हमारी ख्वाहिशें अब हमारे बच्चे पूरे करेंगे और फिर वही शुरू हो जाता है ।हम क्या करते है अपनी ख्वाहिशों को बच्चों के उपर डाल देते है और उसकी अपनी क्या क्या ख्वाहिशें है ये भूल जातें है ।साथ ही हम ये भी भूल जातें हैं कि जब हम इतने से थे तो क्या क्या सोचते थे अब जब उनका टाइम आया तो वहीं सब दोहरा रहें होते है।क्योंकि हमको तब भी लगता है अपना time आएगा ? और ऐसा करते करते पूरी जिन्दगी बीत जाती है और सोचते रहते है। अपना time आएगा !!! एक न एक दिन अपना time आएगा ? और अपना टाइम आते -आते जाने कब जाने का time आ जाता है? और हम अपने साथ अपने सारे सपने लिए दुनिया ही छोड़ देते हैं???? जब हमारे सपने पूरे नहीं होते तो हम क्या करें ??1) या तो हम जिन्दगी में अपने सपनों के साथ समझौता कर लें की जो पूरा हुआ ठीक नहीं पूरा हुआ तो भी ठीक ! इस सपने को देखना ही गलत है ये मेरे लिए नहीं है। और समझौता ही एक मात्र विकल्प है ??? 2) या तो हम जैसा चल रहा है चलने दे और अपनी जिंदगी को इसी तरह गुजार दें जैसा गुजर रहा है ?3) या तो हम कुछ करें कुछ योजना बनाएं और उसको अमल में लाएं ।जितना पूंजी हो उसी हिसाब से शुरू करे क्योंकि कोई काम छोटा नहीं होता बस आप उस छोटे काम को किस मुकाम तक ले जाते हो ये मायने रखता है ।कुछ और विचार करें अपना time तो आया नहीं मगर दूसरों के सारे सपने पूरे हो रहें है ! ऐसा क्यों ? और हम जब अपने आस पास देखतें है तो तो हम पाते है कि हमारे आसपास बहुत से ऐसे उदाहरण के रूप में मौजूद हैं जो छोटी शुरुआत से ही आज बड़ी बड़ी कंपनी के मालिक है ।बस आपको करनी है एक शुरुआत और छोड़ना नहीं है ये सोचते हुए की इस को हम नई उचाईयां कैसे दे ?? और बीच बीच में अपने आपको मोटिवेट करते रहें अच्छी अच्छी पुस्तकें पढ़ें जिस काम को कर रहें होते हैं उससे संबंधित अध्ययन करें। और वक्त को समझे और उस काम को समय दें ऐसे वक्त आते हैं ,जो बहुत सारे अवसर लेकर आते है।कुछ को हम पहचान पाते है और कुछ को हम नहीं पहचान पाते
अवसर मिलने पर भी हम उसका सही से उपयोग नहीं कर पाते कुछ भी गलती हो तो बिना कुछ सोचे समझे रात दिन अपने आपको कोसते रहते है ये कोसना छोड़ कर अपनी गलती को सुधारें और अवसर को पहचाने।
और अंत में कहना है कि अपना time आएगा ये कह कर उसे ईश्वर और भाग्य के भरोसे छोड़ना ये ठीक नहीं इस क्रम को हम ही क्यों न तोड़े ? और एक छोटी शुरुआत करें ।दोस्तों शुरुआत की कोई उम्र नहीं होती ।
शुरू करें और उसे मंजिल तक पहुंचाने के लिए छोटी छोटी मंजिलें बनाए और उसको प्राप्त करें और सेलिब्रेट करें और आगे बढ़ते रहें
धन्यवादऔर आपको बधाई हो नई शुरुआत के लिए

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