तू आजाद है

शहीदों को श्रद्धांजलि

वीर शहीदों के कारण ही देश आज आजाद है।
नमन करो हे भारतवासी अब तो तू आजाद है,

तू आजाद है,
तू आजाद है,
तू आजाद है।

अब तुझे संभालना है देश को ,
शहीदों की ये पुकार है ,

शहीदों की पुकार है,

शहीदों की पुकार है।

देश की आजादी को अब तुझे
बचा के रखना है,

तुझे बचा के रखना है ,

अब तुझे बचा के रखना है।

वीर शहीदों के कारण ही देश आज आजाद है,

नमन करो हे भारतवासी अब तो तू आजाद है,
तू आजाद है,
तू आजाद है,

तू आजाद है,

तू आजाद है।

शहीदों के बलिदानों को हमें नहीं भूलना है,

उनके बलिदानों को दिल में बसा के रखना है,

दिल में बसा के रखना है,

दिल में बसा के रखना है।

वीर शहीदों के कारण ही देश आज आजाद है,

नमन करो हे भारतवासी अब तो तू आजाद है,

तू आजाद है,

तू आजाद है,

तू आजाद है,

तू आजाद है।


रवि का 🙏🙏🙏



अभ्यास एक वरदान

अभ्यास मानव को एक वरदान के रूप में मिला है,

ये आप पर है की आप इसको किस रूप में लेते हो।

इसको हम ऐसे समझ सकते है,

किसी भी बात को बार बार

कहना , दोहराना ,करना, उदाहरण के रूप में -:

एक छोटी सी मजाक को अगर बार बार किसी को

कहा जाय तो वह मजाक बड़ी झगड़े की वजह बनती

है। इस से ये पता चलता है,

इसका उपयोग अगर सावधानी से नहीं किया गया तो

ये आपकी जिंदगी में उथल – पुथल मचा सकता है।

ये बात हम सब जानते है ,

मंत्र भी सिद्घ तब जाके होता है जब उसको बार बार दोहराया जाय ,

ये आदिकाल से मानव एवम् अन्य जीव जगत के लिए

बहुत ही आश्चर्य जनक और किसी भी वस्तु को प्राप्त

करने का मार्ग रहा है,

आज दुनिया का विकास इसी का देन है,

और दुनिया के नाश का कारण भी यही रहा है ।

इसको हम कैसे अपनाते है ये हम पर निर्भर है। हम

किस तरह का अभ्यास करते है, उत्थान के लिए या

पतन के लिए,

ये हम अपने आसपास और अपने आप में भी देख

सकते है।किसी भी कार्य को बार – बार करने से हम

उसमें कुशलता प्राप्त कर लेते है।

इसे हम आजमा भी सकते है

जिन्दगी

जिन्दगी के इस इम्तहान में कौन जीतेगा कौन हारेगा?
पर मजा तो उसे ही आएगा जो किनारे पे बैठ के देखेगा।

रोक लो खुद को कुछ भी कहने से पहले,
आज उसकी तो कल तेरी भी आनी है।

जिन्दगी में सब्र का क्या मोल है,

ये तो उसी को पता है ,जिसने सब्र कर रखा है।

जिन्दगी सबक सिखाने में ,समय का साथ देती है,
अरे ! तू नहीं समझा तेरा इम्तहान लेती है।

जिन्दगी की सच्चाई को उसी ने जाना है,
जिसने अपने आप पे काबू कर पाया है।

वक्त हर समय चलता ही रहता है,

बचपन को लेकर चलते हैं, और

बुढ़ापा आ ही जाता है।

कभी कभी ऐसा लगता है ,वक्त ठहर सा गया है,
लेकिन ये वक्त नहीं ,अपनी सोच है ,यारों।

तू लाख दुहाई दे वक्त को ,
ये वक्त है ये बदलेगा , जरूर।

जिन्दगी उसी की है जिसने ये जाना है ,

कल पर छोड़ना नहीं अपने आज को।

और अंत में

कुछ अच्छे कार्य करने के लिए,

समय मत देखो, यारों,नहीं तो,

तू सोचता ही रह गया और तेरा समय आ गया ……..

जख्म

हालाते दर्द बयां नहीं होता ,

हालाते दर्द बयां नहीं होता, दोस्तों,

और दिल है कि उसे और दर्द चाहिए!!

मेरे दिल के अरमां सारे चुर हो गए ,

मेरे दिल के अरमां सारे चुर हो गए ,दोस्तों,

और उनके अरमानों के पंख लग गए।

आसमां भी आज रो दिया होगा,

आसमां भी आज रो दिया होगा ,दोस्तों,

जब उसने देखा होगा मेरा दर्दे दिल।

अब अपने ही दर्द देते हैं ,

अब अपने ही दर्द देते हैं, दोस्तों,

अरे! दूसरों को क्या पता मेरा जख्मे दिल।

इक इक जख्म को कुरेदा है अपनों ने,

इक इक जख्म को कुरेदा है अपनों ने,दोस्तों,

ये आदत है कि उनकी जाती नहीं।

अब स्वर्ग जाने की तमन्ना नहीं ,

अब स्वर्ग जाने की तमन्ना नहीं, दोस्तों,

वतने धरा ही काफी है मेरे लिए।

और अंत में जमाने से कह दो ,

और अंत में जमाने से कह दो, दोस्तों,

ये जमाना हमसे है हम जमाने से नहीं।

बातें

अगर आपकी जिंदगी नरक है,
तो आपके सोच में और कर्म में फर्क है।

अगर आप चाहते हैं कुछ बड़ा करना,

तो अपने सीमाओं के पार तक सोचो।

छोटी बातें

१)यादें कितनी महत्वपूर्ण है ,
ये मायने नहीं रखता।
बल्कि ये ज्यादा महत्वपूर्ण है कि आपके उन यादों में आपको क्या याद हैं ?
अच्छी बातें या बुरी बातें
अक्सर हमने देखा है याद वही रहता है जो या तो बहुत बुरी होती है ,
या बहुत अच्छी होती है।
किसी के अच्छे व्यवहार से ज्यादा, हम उसके बुरे व्यवहार को याद रखते है।
किसी ने आपके साथ लाखों बार अच्छे बर्ताव किए हो ,अगर वही इंसान ने एक बार आपके साथ बुरा बर्ताव किया तो हम उसके सारे अच्छे व्यवहार को भूल कर ,उसके बुरे बर्ताव को याद रखते है।
हमेशा हमारा मन बुरे को ही नहीं याद रखता , वह अच्छे को भी याद रखता है ;लेकिन वही बात याद रहता है जो बहुत ही कठिन परिस्थिति में जब कोई आपका साथ देता है ।इस अवस्था में मन उस परिस्थिति को याद रखता है।
२) अक्सर हमने देखा है परिवार के कलह का मुख्य वजह उसका अपनापन होता है ।
अपनेपन में हम कुछ अगर किसी कहते है ,तो सामने वाला भी उसी अपनेपन से सुनता है और हम कुछ ज्यादा ही अपनेपन की उम्मीद कर बैठते है , लेकिन ये नहीं सोचते कि अभी उसकी परिस्थिति क्या है।अभी अंदर से कैसा महसूस कर रहा है।

उसके बाद आपने कुछ भी गलत बोला तो आपकी बातें उसे बहुत ही खराब लगती है अगर यही बातें उसे किसी और ने कही होती तो उसको वह माफ़ कर देता मगर आपको माफ़ नहीं करेगा ।क्योंकि अब बात उसके आत्मसम्मान की आ जाती है,और यही बातें जब कोई दूसरा व्यक्ति कहता है तो वह उसको उतना तब्बजो नहीं देता , माफ़ भी जल्दी ही कर देता है और भूल भी जाता है क्योंकि वो अपना नहीं पराया है।तो अब बात आती है कि ऐसे में हम क्या करें ?
दिल बड़ा करे जब आप उसी बात के लिए दूसरों को माफ़ कर सकते है ; तो अपनो को क्यों नहीं!

इंसान

तू इंसा है, तू ही इंसा है
तू हिम्मत है,

तू ही जज्बा है,
तू तुफां है ,

तू ही शांति है।
तू इंसा है ,तू ही इंसा है ।

तू आदि है ,

तू ही अनंत है।

तू क्रोधी है ,

तू ही संत है।

तू इंसा है ,तू ही इंसा है।

तुझ से ये सारा जहां ,

तेरे बिना कुछ नहीं यहां।

तू बर्बादी है,

तू ही आबादी है।

तू इंसा है ,तू ही इंसा है।

भूख

उसने दो दिनों से कुछ भी नहीं खाया था ।

अब कोई काम भी नहीं मिल रहा था ।

अब उसके पास एक रुपया भी नहीं था ,

बड़ा ही स्वाभिमानी था, कभी किसी से कुछ मांगता नहीं था ।

बिना कुछ काम किए वह किसी का कुछ भी नहीं लेता था।

उसमें ईमानदारी कूट कूट कर भरी थी।

आज तक किसी को कुछ भी कहने का मौका नहीं दिया था।

लेकिन आज जब वो दो दिन से भूखा है ,

कोई स्वाभिमान और ईमानदारी काम नहीं आ रही थी।

स्वाभिमान उसे मांगने से रोकती थी,

और ईमानदारी उसको किसी भी तरह के अनैतिक कार्य करने से रोक रही थी।

हर आने जाने वाले की ओर एक बार देखता और बिना कुछ बोले अपना सिर झुका लेता ,

जैसे कोई बड़ा गुनाह किया हो……

क्या इस तरह कोई उसकी मदद करेगा ?

या भूख से वो मर जाएगा ?

और स्वाभिमान की वजह किसी से कुछ बोलेगा नहीं

तो उसकी मदद करेगा कौन ?

या भूख से वो मर जाएगा ?.…………..

अच्छी आदतें

आदतें इंसान को बेहतरीन बना देती है ,
आदतें जो बनते अच्छे ,

आपको अच्छा बना देती है ।

चाहे हर कोई पाना मंजिल को ,

दोस्तों,
चाहे हर कोई पाना मंजिल कोपर मंजिल मिलता उसी को ,

जो आदतें अच्छी बना लेते हैं ,

जो आदतें अच्छी बना लेते हैं ।

आदतें इंसान को बेहतरीन बना देती है।

जिन्दगी में चाहे हर कोई आजादी,दोस्तों,

जिन्दगी में चाहे हर कोई आजादी पर आजादी भी उसी ने पाया ,

अपनी गंदी आदतों से जो,दूरी बना लेते हैं।

आदतें इंसान को बेहतरीन बना देती है ।

बदलते अक्सर रातों को करवटें ,

दोस्तों,

बदलते अक्सर रातों को करवटें,

आदतें जो अपनी गंदी बना लेते हैं ।

आदतें इंसान को बेहतरीन बना देती हैं।

अक्सर उनको बिस्तर पर जाते ही नींद आ जाती है,

दोस्तों,

अक्सर उनको बिस्तर पर जाते ही नींद आ जाती हैजो अपनी आदतों को मेहनती बना लेते हैं ,

जो अपनी आदतों को मेहनती बना लेते।

आदतें इंसान को बेहतरीन बना देती है ।

अक्सर शरीरें जबाव देने लगती वक्त से पहले,

दोस्तों,

अक्सर शरीरें जबाव देने लगती वक्त से पहले,

आदतें जिनको अंधा बना देती हैं,

आदतें जिनको अंधा बना देती हैं।

आदतें इंसान को बेहतरीन बना देती है।दोस्तों,

गंदी आदतें हमें शुरू में मजा ,

अंत में सब दिन के लिए रोगी बना देती है।

अच्छी आदतें शुरू में मेहनती ,

अंत में सब दिन के लिए सुखी बना देती है।

और अंत में दोस्तों,

अच्छी आदतें हमें अपनाना है या ना अपनाना है खुद पर निर्भर है ,

वरना

जिन्दगी तो हर हाल में कटा
करती है,

जिन्दगी तो हर हाल में कटा
करती है।

जिद

गुस्से में आकर उसने अपना घर छोड़ तो दिया ,लेकिन
ना तो उसको बोलने का सलीका था, और ना ही वह सीधा मुंह किसी से बात करता था।
सभी कहते थे मा बाप के लाड प्यार ने उसको बिगाड़ दिया था।
घर से बाहर वह अकेले पहली बार निकला था, उसके मन में गुस्सा भरा था ।
और वह बिना कुछ सोचे समझे चला जा रहा था।

उसके घर से निकलते वक्त उसके जेब में एक हजार रूपए मात्र थे।
रास्ते भर सोच रहा था मुंबई जाऊंगा ,मगर उसके पास पैसे बहुत कम थे,
इससे पहले वह अपने मां और पिताजी के साथ मुंबई और कोलकात्ता घूमने गया था , जिससे उसको इतना तो पता था कि मुंबई महगां शहर है, और कलकत्ता सस्ता शहर है।

इसलिए उसने कोलकात्ता जाने का निश्चय किया , और कोलकात्ता का टिकट लेकर ट्रेन में बैठ गया।
कोलकाता पहुंचने पर कुछ दिन इधर – उधर भटकता रहा। दिन और रात को किसी सस्ते से ढाबे पर जाकर खाना खाता और किसी मंदिर के पास या किसी रेलवे स्टेशन पर जाकर सो जाता। पैसे अब ख़तम होने वाले थे ,
और अब उसे अपने घर की याद आने लगी थी। मां और पिताजी की याद आने लगा था।
लेकिन जब जब घर की याद आती तब तब उसे अपने फैसले की याद आ जाती ,की वह क्या कहकर घर से निकला है ,की वह अपने पैर पर खड़ा होकर आएगा,
या तो नहीं आएगा ।

अपनी ही जाल में खुद उलझ चुका था,
कोई काम जानता नहीं था।
अब करे तो क्या करे?
उसने सोचा बिना काम किए तो अब जीना भी मुश्किल हो जाएगा।
इसलिए उसने कुछ भी काम करने की ठानी,
और निकल पड़ा काम की तलाश में,
हर तरह के दुकान में गया ,लेकिन बिना गारंटी के कोई भी काम देना नहीं चाहता था।
अब उसके जेब में मात्र 100 रुपए बचे थे जिसमे ना तो वह घर जा सकता था और ना ही दो दिन से ज्यादा खाना खा सकता था ,आज सुबह वह काम की तलाश में बिना खाए ही निकल गया , लेकिन काम नहीं मिला, दिन के 12 बजे तक उसने काम के तलाश में इधर – उधर हाथ पैर मारता रहा ,लेकिन कोई काम नहीं मिला ,अब उसने सोचा जब तक पैसा कमाना शुरू नहीं कर दूंगा , खाना नहीं खाऊंगा।
दोपहर में उसने पानी पी कर काम चलाया।
और फिर काम की तलाश में लग गया, एक जगह काम मिला भी लेकिन वह काम उसके वश का नहीं था,
बहुत ही भारी गट्ठर को उठा कर एक जगह से दूसरे जगह पर रखना था।
दूसरा दिन भी ऐसे ही गुजर गया था ,बिना खाए एक दिन गुजर गया ,सुबह हुई पानी पीकर फिर काम के तलाश में निकल गया,
आज तो किसी भी हाल में उसको काम ढूंढना था, क्योंकि काम से पैसा मिलेगा तब तो उससे खाना खाएगा, उसकी भूख से हाल बेहाल था ।
उसे बार बार अपने परिवार की याद आती की कैसे खाना में थोड़ा सा भी देरी नहीं होता था, और थोड़ा भी देरी होने पर सब उसको मनाने में लग जाते थे।
आज उसे पूरे एक दिन हो गए थे।
खाना खाए ,लेकिन कोई पूछने वाला नहीं था।
काम की तलाश करते करते वहबहुत दूर निकल चुका था ,
दोपहर हो चुकी थी ,अब भूख और प्यास और जोर से लगने लगी ।
वह छायादार जगह की तलाश करने लगा जहां उसको पानी के साथ आराम करने की जगह भी मिले ,ऐसा ही जगह उसको मिल भी गया वह आम और नींबू का बागान था , वहीं पास में चापाकल था, वहीं उसने पानी पिया और आराम करने लगा,
और भी आदमी वहां आराम कर रहे थे ,उस छायादार जगह में
आपस में बात चीत भी कर रहे थे
वहां नींबू भी बिक रहा था ,आम भी बिक रहा था
नींबू और आम वहां बहुत ही सस्ते में मिल रहे थे,तभी उसके मन में ख्याल आया कि क्यों न इसको बेचने का काम किया जाए ,
लेकिन उसके पास मात्र 100 रूपए ही थे ,दोनों के दाम पता करने पर नींबू बहुत सस्ता लगा ,शहर में 10 का 2 देता है
और यहां 10का 10 उसने सोचा नींबू ही खरीदा जाए , और शहर में बेचा जाए।
इतना सोचने के बाद वह नीबू वाले के पास गया और नींबू का दाम करने लगा पहले तो नींबू वाले को लगा ,
की 1या 2 खरीदेगा ,जब उसने कहा 100 लूंगा तो कहा ठीक है ,75 पैसे का 1 लगा दूंगा ।
इस पर वह मान गया,
और एक प्लास्टिक का बैग भी दे दिया और उसमे 100 नींबू भर दिया , भूख के कारण उसको चला भी नहीं जाता था ,लेकिन उसने मन में ठान लिया था जब तक पैसा कमाऊंगा नहीं खाऊंगा नहीं ।

उसके भूख ने उसको बेचना सीखा दिया ,नींबू बेचने में उसने अपनी पूरी ताकत झोंक दी।
पूरे दिन घूम घूम कर उसने 99नींबू बेच दिए
वहां लोग 10 में 2 देते थे और ये 10 में 3 देने लगा। रात तक उसने लगभग सारे नींबू को बेच दिया।
इस तरह उसने अपने जिन्दगी की पहली कमाई की ,जिसमें उसको फायदा भी हुआ 75 का 333 रात को उसने खाना खाया , और अगले दिन के लिए योजना तैयार करने लगा ,की कल उसको क्या करना है,
दूसरे दिन वह सवेरे वहां नींबू लेने पहुंच गया ।
आज वह 150 रूपए का नींबू का खरीदा 200 जिसमें 100 नींबू सुबह से दोपहर तक और बचे नींबू दोपहर को खाना खाने के बाद रात तक घूम – घूम कर बेच दिया। इस बार भी उसको फायदा हुआ फिर अगले दिन वह लग गया काम में
इस बार वह सुबह से ही नींबू बेचने लगा शाम तक उसने लगभग पूरे नींबू को बेच दिया आज भी उसको 4 गुना से जायदा का फायदा हुआ।
अब उसको थोड़ा – थोड़ा भरोसा अपने उपर होने लगा था। की वह अब कुछ कर सकता है।

अब उसने 10 दिन तक रोज जगह बदल बदल कर नींबू बेचा।
अब उसके पास कुछ पैसे जमा हो गए थे, और कुछ जान पहचान भी हो गई थी , जिसके वजह से उसको रहने के लिए खोली मिल गई।
इस तरह से रोज वह मेहनत करने लगा कुछ दिनों के बाद उसने एक ठेला ले लिया और अब उसने नींबू के साथ खेत से कुछ ताजी सब्जी भी रखने लगा ….…………..

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