शुभकामना

हिंदी दिवस की हार्दिक शुभकामना

राहत

राहत मिलती है तेरी यादों से ,

मेरी जज्बातों को सकून मिलता है।

जब भी लिख के इजहार करता हूं,

जाने क्यों दिल को आराम मिलता है।

रात को आसमां देखने की आदत हो गई है,

टिमटिमाते तारों में तू नजर आती है।

कभी- कभी संगीत सी बज उठती है कानों में,

ऐसा लगता है जैसे तूने आवाज लगाई है।

अब छिपाने की आदत लग गई जिगरा ,

लोगों अब भी लगता है,

तू आसमां से मुझसे मिलने आती है।

राहत मिलती है तेरी यादों से ,

मेरी जज्बातों को सकून मिलता है।

जब भी लिख के इजहार करता हूं,

जाने क्यों दिल को आराम मिलता है।

माया

माया क्या है?

क्या हम सब इससे बंधे है?

क्या संसार सम्पूर्ण माया है ?

अब बात ये है कि हम माया को कैसे जाने?

इसका एक प्रत्यक्ष प्रमाण है।

की अगर कोई इंसान आपके अनुसार से कार्य नहीं कर रहा है,
तो मायावश आपको क्रोध आनी है।
अगर कोई आपका कार्य करे तो ,
या आपकी बड़ाई करे तो आप उसको पसंद करते है।

कोई आपका इज्जत करे तो आप खुश होते हो मायावश अच्छा अनुभव होता है।

यदि आपका कोई बुराई करे या आपकी बातों की अवहेलना करे तो मायावश आप उससे ईर्ष्या और द्वेष रखते हो।

आपको अपने मान अपमान का डर होता है ।

आपके लिए आपकी इज्जत ही सबसे बड़ी होती है ,
यही सब तो है माया – राग ,द्वेष ,प्रेम, घृणा ,क्रोध आदि ये सब माया के ही तो हथियार है।

और हमसब उसके शिकार है।

इसलिए तो कहते है जिसने माया का पार पाया उसके लिए मान और अपमान दोनों बराबर है।

आप उनका अपमान करो तो भी ठीक ,या आप उनको मान दो तो भी ठीक।

इनको पता है कि ये सब माया है,
और ये सब चलता रहेगा ।

रिश्ता

जाने क्या बात थी कुछ दिनों से उसने बात करना तो दूर की बात ,
मेरे तरफ देखना भी बंद कर दी थी।

मैं उसके इस बेरुखी से बहुत परेशान था ,
की मैंने आखिर क्या कह दिया ,
मेरे किस बात ने उसको चोट पंहुचाई है।

जिनको कल तक बात किए बिना चैन ना था, आज वो मेरे तरफ देखते भी नहीं,कई बार मैंने बात करने की कोशिश भी की ,लेकिन
उसने कोई जबाब नहीं दिया।

मेरी दिल की बेचैनी बढ़ती जा रही थी,

मैं रोज इस इंतजार में था कि कब वो आए जो बात हो सके,
इंतजार करते करते एक महीना बीत चुका था।

अब बर्दाश्त से बाहर हो चुका था,
अगले दिन मैं खुद ही उसके घर जाने का निश्चय किया।

उसके घर जाने के बावजूद वो मुझसे बात नहीं कर रही थी,
अंत में हारकर मैं उसके छोटी बहन से मिला और पूछा क्या बात है आपकी बहन उदास क्यों है।

तब उसने बताया कि वो किसी से छुप छुप कर मिलती और बात करती थी,।

मां ने पिताजी को बताया , और मां और पिताजी दोनों ने मिलकर कहा ,क्या कोई मुझसे बढ़ कर हो गया जो मुझसे बिना कहे तू उससे मिलती और बात करती है। या मेरे प्यार में कोई कमी रह गई?

जब तक मेरी बहन कुछ बोलती तब तक गुस्से में आकर मां ने कहा दिया अगर अब बात की या मिली तो मेरा मरा मुंह देखेगी।

उस दिन से वह ना वह उससे बात करती है, और ना ही मिलने जाती है ।
इतना सुन कर मैं वापस आ गया ।

रास्ते भर सोचता रहा कि ,क्या उसका फैसला सही था?

क्या उसके फैसले पर मुझे उसका साथ देना चाहिए?

संपूर्णता

दुनिया में सिर्फ दो तरह के इंसान का अस्तित्व है,

योगी और भोगी,

दूसरे तरीके से कहे तो इस दुनिया में दो तरह के लोग रहते है।

योगी एवम् भोगी,

अगर आप पूर्णता का अल्पकालिक अनुभव करना चाहते है

तो

आप भोगी की राह पर जा सकते है ,

या आप दीर्घकालीन पूर्णता का अनुभव करना चाहते है
तो

योगी के राह पर चल सकते है।

अगर योग और भोग दोनों का अनुभव करना चाहते है

यानी

योग और भोग,दोनों के साथ रहना चाहते है ,

तो

दोनों के बीच सही तालमेल रखना होगा,

जिससे आप संपूर्णता का अनुभव कर सके।

सारांश :- हमें जिन्दगी में संपूर्णता का अनुभव

करने के लिए योग एवम् भोग को संतुलित करना होगा

किसान

उसके पूरे शरीर पर मिट्टी लगा था,

पर आंखों में इक अलग सी चमक थी,

चेहरे पर संतोष का भाव था।

पूछने पर पता चला -: दो बार फसल के डूबने पर ,

वह तीसरी बार धान लगा के आया है ।

हर बार की तरह इस बार भी पूरा विश्वास है कि फसल बच जाएगा

मैं क्या कर सकता हूं?

स्वतंत्रता दिवस की अग्रिम शुभकामना के साथ

ए मातृभूमि तेरे लिए मैं क्या कर सकता हूं,

तेरे उपकारों का, क्या मैं बदला चुका सकता हूं?

मां मेरी मुझे इक मौका दे,

तेरे लिए मां अपनी शीश कटा सकता हूं।

ए मातृभूमि तेरे लिए मैं क्या कर सकता हूं?

तेरे उपकारों का ,क्या मैं बदला चुका सकता हूं?

मगर ए मां मैं चाहता हूं कुछ अलग करना,

इसके लिए मुझे चाहे कुछ भी पड़ जाए करना।

मां मैं चाहता हूं दुश्मनों के दांत खट्टे करना,

आंख उठाकर कोई देख ना पाए ,

तेरी ओर ,ऐसा काम करना चाहता हूं।

ऐ मातृभूमि मैं तेरे लिए क्या कर सकता हूं?

तेरे उपकारों का क्या मैं बदला चुका सकता हूं?

मां तेरे राहों के काटें निकालना चाहता हूं,

तेरे लिए मां, मैं इस जग को सुंदर बनाना चाहता हूं।

ऐ मातृभूमि मैं तेरे लिए क्या कर सकता हूं?

तेरे उपकारों का क्या मैं बदला चुका सकता हूं?

तू आजाद है

शहीदों को श्रद्धांजलि

वीर शहीदों के कारण ही देश आज आजाद है।
नमन करो हे भारतवासी अब तो तू आजाद है,

तू आजाद है,
तू आजाद है,
तू आजाद है।

अब तुझे संभालना है देश को ,
शहीदों की ये पुकार है ,

शहीदों की पुकार है,

शहीदों की पुकार है।

देश की आजादी को अब तुझे
बचा के रखना है,

तुझे बचा के रखना है ,

अब तुझे बचा के रखना है।

वीर शहीदों के कारण ही देश आज आजाद है,

नमन करो हे भारतवासी अब तो तू आजाद है,
तू आजाद है,
तू आजाद है,

तू आजाद है,

तू आजाद है।

शहीदों के बलिदानों को हमें नहीं भूलना है,

उनके बलिदानों को दिल में बसा के रखना है,

दिल में बसा के रखना है,

दिल में बसा के रखना है।

वीर शहीदों के कारण ही देश आज आजाद है,

नमन करो हे भारतवासी अब तो तू आजाद है,

तू आजाद है,

तू आजाद है,

तू आजाद है,

तू आजाद है।


रवि का 🙏🙏🙏



अभ्यास एक वरदान

अभ्यास मानव को एक वरदान के रूप में मिला है,

ये आप पर है की आप इसको किस रूप में लेते हो।

इसको हम ऐसे समझ सकते है,

किसी भी बात को बार बार

कहना , दोहराना ,करना, उदाहरण के रूप में -:

एक छोटी सी मजाक को अगर बार बार किसी को

कहा जाय तो वह मजाक बड़ी झगड़े की वजह बनती

है। इस से ये पता चलता है,

इसका उपयोग अगर सावधानी से नहीं किया गया तो

ये आपकी जिंदगी में उथल – पुथल मचा सकता है।

ये बात हम सब जानते है ,

मंत्र भी सिद्घ तब जाके होता है जब उसको बार बार दोहराया जाय ,

ये आदिकाल से मानव एवम् अन्य जीव जगत के लिए

बहुत ही आश्चर्य जनक और किसी भी वस्तु को प्राप्त

करने का मार्ग रहा है,

आज दुनिया का विकास इसी का देन है,

और दुनिया के नाश का कारण भी यही रहा है ।

इसको हम कैसे अपनाते है ये हम पर निर्भर है। हम

किस तरह का अभ्यास करते है, उत्थान के लिए या

पतन के लिए,

ये हम अपने आसपास और अपने आप में भी देख

सकते है।किसी भी कार्य को बार – बार करने से हम

उसमें कुशलता प्राप्त कर लेते है।

इसे हम आजमा भी सकते है

जिन्दगी

जिन्दगी के इस इम्तहान में कौन जीतेगा कौन हारेगा?
पर मजा तो उसे ही आएगा जो किनारे पे बैठ के देखेगा।

रोक लो खुद को कुछ भी कहने से पहले,
आज उसकी तो कल तेरी भी आनी है।

जिन्दगी में सब्र का क्या मोल है,

ये तो उसी को पता है ,जिसने सब्र कर रखा है।

जिन्दगी सबक सिखाने में ,समय का साथ देती है,
अरे ! तू नहीं समझा तेरा इम्तहान लेती है।

जिन्दगी की सच्चाई को उसी ने जाना है,
जिसने अपने आप पे काबू कर पाया है।

वक्त हर समय चलता ही रहता है,

बचपन को लेकर चलते हैं, और

बुढ़ापा आ ही जाता है।

कभी कभी ऐसा लगता है ,वक्त ठहर सा गया है,
लेकिन ये वक्त नहीं ,अपनी सोच है ,यारों।

तू लाख दुहाई दे वक्त को ,
ये वक्त है ये बदलेगा , जरूर।

जिन्दगी उसी की है जिसने ये जाना है ,

कल पर छोड़ना नहीं अपने आज को।

और अंत में

कुछ अच्छे कार्य करने के लिए,

समय मत देखो, यारों,नहीं तो,

तू सोचता ही रह गया और तेरा समय आ गया ……..

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