सुकून

ए मेरे दिल के सकून,मैं तुझसे क्या उम्मीद करूं,इस बिगड़ती माहौल में,तेरे साथ चैन से रह पाऊंगा।या तू भी साथ छोड़ देगा,मेरे ख्वाब की तरह।तुझे खोने के डर से छिपता फिरता हूं।और तू जाने को तैयार है,मौसम की तरह।

उन्हें क्या पता

तेरे दर्द से परेसां हूं मैं ! ऐसा लगता है कि बिमार हूं मैं!! मेरी खामोशी का मतलब ना निकालना! तुम्हे क्या पता, मतलब निकालने में माहिर हूं मैं!! तुम्हे पसंद नहीं मेरा आना! पर तुम्हे क्या पता , घर से भागने में माहिर हूं मैं!! यूं ना दिल जलाओ मेरा ! तुम्हे क्या पता,Continue reading “उन्हें क्या पता”