इंतजार

इंतजार बस इंतजार तेरा ,        तू है बस, तू ही है प्यार मेरा। इस जहां को भी तेरी चाहत है,        तू आएगी ये वक्त का इशारा है। आईने सोच सोच संवरे है,        तेरी आने की जो आहट है। इंतजार बस इंतजार तेरा,        तू है बस  तू ही है प्यार मेरा। अब तो दिन भी रातContinue reading “इंतजार”

पत्थरों का शहर

अपने शहर में बेगानों सा रहता हूं, ये हमारी उलझन है या उलझने आम है। काम तमाम रहता है बोझ बनके , या जिन्दगी बोझिल सी लगती है। अपने पराए हुए लगते है, अब तो, लगता है, पत्थरों के शहर में रहते है। जान जो देते थे एक – एक बात पर मेरे लिए आजContinue reading “पत्थरों का शहर”

प्यार

आजा थोड़ा आराम कर ले,      जिन्दगी को थोड़ा प्यार कर ले। वक्त तो नहीं तेरे पास ,       लेकिन कुछ तो वक्त निकाल ले। माना दुश्वारियां है बहुत ,       पर तुझमें समझदारी भी है बहुत,              कुछ तो समझदारी दिखा ले। आजा थोड़ा आराम कर ले,        जिन्दगी को थोड़ा प्यार कर ले। मन को थोड़ा शांत कर,        Continue reading “प्यार”

ख़ामोश जिन्दगी

क्यूं खामोश है जिन्दगी ,     क्या बात है? हर बात में ठंडी आहें,     क्या बात है? रात को तारें गिनना,    गिनकर यूं मुस्कुराना,          क्या बात है? राह चलते – चलते यूं गिर पड़ना,        गिर कर फिर संभल जाना,                क्या बात है? जुबां से कोई बात नहीं निकलती,        दिल के अरमान दबा के बैठे हैं,                Continue reading “ख़ामोश जिन्दगी”

दर्द से रिश्ता

अब दर्द का दर्द से रिश्ता बन रहा है। तेरा यूं नजर चुराना मेरे दर्द का सबब बन रहा है। दिन हो या रात हो बस तेरी ही बात हो। डूब के दर्द में दर्द से ही इश्क करने लगा हूं। ये मेरे दिल का भ्रम है या सचमुच तुम हो। मेरी बातों का होContinue reading “दर्द से रिश्ता”

शरारत

उसके नजरों की शरारतअब बढ़ने लगी है। बात कुछ नहीं थी ,बात बढ़ने लगी है। दिल का बोझ अब धीरे -धीरउतरने लगा है। उसके नजरों की शरारतअबबढ़ने लगी है। नींद आंखों की अब आंखोंसे जाने लगी है। रात रात भर जाग के दिलमचलने लगा है। उसके नजरों की शरारत अबबढ़ने लगी है। दिल की बैचैनीContinue reading “शरारत”

दिल चाहता है

मैं सोचता हूं कुछ लिखूं तेरे बारे में ये दिल है कि छुपाने को कहता है। मैं चाहता हूं कि चिल्ला के कहूं सबसे ये दिल है कि चुप रहने को कहता है। मैं चाहता हूं हल्का हो दिल के बोझ ये दिल है कि बोझ ढोने को कहता है। मैं चाहता हूं ये गमContinue reading “दिल चाहता है”

अंतकाल

जब उम्र बिता भाई तब जाके अकल आई। क्या खोया क्या पाया क्या सारी उम्र गंवाया। आज तुझे पता चला तेरी हैसियत कुछ नहीं। जब आई हलक में जान तब तुझे ,सुझे आसमान। तुझे दिया जिन्दगी तू समझा दिल्लगी। कोई खेल में लागा कोई मौज में लागा। जब आई तेरी बारी तू होश में जागा।Continue reading “अंतकाल”

कृष्ण – सुदामा

जब जहां की सारी हदें पार कर लो, दुनिया की सारी इम्तहान पास कर लो, जब तेरे पास कोई मंजिल ना बचा हो तूने सारी मंजिलें पा ली हो, जब ये दुनिया के गम तुझे सताने लगे जब निराशा तुझे घेरने लगे हो, तब मुझे याद करना मेरे दोस्त। तब मुझे याद करना मेरे दोस्त।Continue reading “कृष्ण – सुदामा”

खामोशी

मेरे जज्बातों को दिशा दो मेरे जीने की पता दो। यूं खामोश रहकर बात ना बढ़ाओ कुछ तो वफ़ा करो।। खामोश मंजर की खता नहीं ये तो हाल है दिल का। अक्सर दिल की बातें दिल में ही दबी रहती है।। तू अनजान बनी रहती है मेरी जज्बातों से। मैं तरपता रहता हूं तेरी बातोंContinue reading “खामोशी”