अबोध

अल्प ज्ञानी ,कुछ ना मानी।कुछ सही कुछ ग़लत पैमानी।। ना दिन ना रात जानि।अल्प बोधी वयक्त अभिमानी।। शोभा सुंदर की बात बेईमानी।अक्खर पक्कर सब सहानी।। तृष्णा कृष्णा घोर माया। ना ममता ना देही काया।। रस रंग सब उपज की खानी।मन में बसे दिल में नाही।दिल में बसे सब जगह पांही।।। अनहद नाद सुवाद सबे ओर।जिनContinue reading “अबोध”

बर्दाश्त

बहुत कुछ झेला है देश ने अब बर्दाश्त नहीं कर पाता हूं, ऐ भारत माता तू कहे तो , अब डंडा लेके चलता हूं। लूटता आया है कई सदी से, अब लूटने को क्या खाक रहा रहम रहम के चक्कर में रहमोकरम पर ही छोड़ा क्या कम थी पहले परेशानी , जो तुमने और बढ़ाई।Continue reading “बर्दाश्त”

चांद

चांद को देखा मैंने झुरमुट से निकलते , कभी इधर से तो कभी उधर से झांकते। कभी बादलों में छिपते ,कभी आसमां में खिलते।कभी इतराते तो कभी,बादलों कि सवारी करते।चांद को देखा मैंने झुरमुट से निकलतेकभी इधर से तो कभी उधर से झांकते।कभी रात को सुलाते ,कभी खुद ही सो जाते।कभी तनहाई में,कभी तारों काContinue reading “चांद”

मझधार

क्या लिखूं ए जिन्दगीमझधार में हूंदिल को तलाश हैबेकरार भी हूं।दिल अनजान है,उदास भी हूं।कभी कभी तो ऐसा सोचता हूं।बदल दूं अपनी फितरत को पर,कुछ ही पलों में फितरत अपना रंग दिखाता है, औरमैं फिर से मैं हो जाता हूं। कभी कभी राज से पर्दा हटते हटते, राज और गहरा हो जाता है ।हमको लगताContinue reading “मझधार”

मैं क्या कर सकता हूं?

स्वतंत्रता दिवस की अग्रिम शुभकामना के साथ ए मातृभूमि तेरे लिए मैं क्या कर सकता हूं, तेरे उपकारों का, क्या मैं बदला चुका सकता हूं? मां मेरी मुझे इक मौका दे, तेरे लिए मां अपनी शीश कटा सकता हूं। ए मातृभूमि तेरे लिए मैं क्या कर सकता हूं? तेरे उपकारों का ,क्या मैं बदला चुकाContinue reading “मैं क्या कर सकता हूं?”