बिहार

बिहार शब्द संस्कृत शब्द विहार का तदभव है जिसका अर्थ होता है मठ अर्थात भिक्षुओं का निवास स्थान। बिहार का उल्लेख सर्वप्रथम शतपथ ब्राह्मण से मिलता है, जिसमे मिथिला के गौरवशाली समाज की आधार शिला रखने वाले विदेह माधव नामक राजा का वर्णन किया गया है। करीब 12 वीं शताब्दी के अंत में ओदंतपुरी तथाContinue reading “बिहार”

साथ चल रहा हूं

ऐ वक्त तेरे साथ चलने को भरसक कोशिश कर रहा हूं ऐसा लगता है कभी तू आगे और कभी मैं आगे निकल रहा हूं। तू मेरे साथ है यही सोच के कभी तन्हा कभी महफ़िल कभी कारवां के साथ निकल रहा हूं। तेरे साथ कदम से कदम मिला कर चलने में अब अंधेरों को भीContinue reading “साथ चल रहा हूं”

कौन कहे

बहुत दिनों तक शहर में रहने के पश्चात एक लड़का अपने पिता से मिलने गाँव आया। अपने पिता को मेहनत करते देख उसने सोचा थोडा पिताजी का हाथ बटाया जाए । और वह पिता के साथ  काम करने लग गया लेकिन काम था कि खत्म होने का नाम नहीं ले रहा था। दोपहर से शामContinue reading “कौन कहे”

शरारत

उसके नजरों की शरारतअब बढ़ने लगी है। बात कुछ नहीं थी ,बात बढ़ने लगी है। दिल का बोझ अब धीरे -धीरउतरने लगा है। उसके नजरों की शरारतअबबढ़ने लगी है। नींद आंखों की अब आंखोंसे जाने लगी है। रात रात भर जाग के दिलमचलने लगा है। उसके नजरों की शरारत अबबढ़ने लगी है। दिल की बैचैनीContinue reading “शरारत”

अबोध

अल्प ज्ञानी ,कुछ ना मानी।कुछ सही कुछ ग़लत पैमानी।। ना दिन ना रात जानि।अल्प बोधी वयक्त अभिमानी।। शोभा सुंदर की बात बेईमानी।अक्खर पक्कर सब सहानी।। तृष्णा कृष्णा घोर माया। ना ममता ना देही काया।। रस रंग सब उपज की खानी।मन में बसे दिल में नाही।दिल में बसे सब जगह पांही।।। अनहद नाद सुवाद सबे ओर।जिनContinue reading “अबोध”

चुटकुले

मैं घंटे भर से तुम्हे समझा रहा हूं और तुम्हारी समझ में बात नहीं आ रही है! तुम्हारे दिमाग में गोबर भरा है। जब आपको पता है तो उसे घंटे भर से चाट क्यों रहे है? पिता अपने बच्चे से – बेटा तुम्हे कितनी बार समझाया है कि वह सचमुच का शेर नहीं तस्वीर हैContinue reading “चुटकुले”

दिल चाहता है

मैं सोचता हूं कुछ लिखूं तेरे बारे में ये दिल है कि छुपाने को कहता है। मैं चाहता हूं कि चिल्ला के कहूं सबसे ये दिल है कि चुप रहने को कहता है। मैं चाहता हूं हल्का हो दिल के बोझ ये दिल है कि बोझ ढोने को कहता है। मैं चाहता हूं ये गमContinue reading “दिल चाहता है”

अंतकाल

जब उम्र बिता भाई तब जाके अकल आई। क्या खोया क्या पाया क्या सारी उम्र गंवाया। आज तुझे पता चला तेरी हैसियत कुछ नहीं। जब आई हलक में जान तब तुझे ,सुझे आसमान। तुझे दिया जिन्दगी तू समझा दिल्लगी। कोई खेल में लागा कोई मौज में लागा। जब आई तेरी बारी तू होश में जागा।Continue reading “अंतकाल”

कृष्ण – सुदामा

जब जहां की सारी हदें पार कर लो, दुनिया की सारी इम्तहान पास कर लो, जब तेरे पास कोई मंजिल ना बचा हो तूने सारी मंजिलें पा ली हो, जब ये दुनिया के गम तुझे सताने लगे जब निराशा तुझे घेरने लगे हो, तब मुझे याद करना मेरे दोस्त। तब मुझे याद करना मेरे दोस्त।Continue reading “कृष्ण – सुदामा”