खामोशी

मेरे जज्बातों को दिशा दो मेरे जीने की पता दो। यूं खामोश रहकर बात ना बढ़ाओ कुछ तो वफ़ा करो।। खामोश मंजर की खता नहीं ये तो हाल है दिल का। अक्सर दिल की बातें दिल में ही दबी रहती है।। तू अनजान बनी रहती है मेरी जज्बातों से। मैं तरपता रहता हूं तेरी बातोंContinue reading “खामोशी”

खोज

हर इंसान के अंदर हमेशा खोज चलता रहता है। और उम्र के साथ उसकी अंदर के खोज को वह बाहर खोजने लगता है, इसलिए वह हर वस्तु को खोजी की तरह देखता है। और जहां भी उसे उसके खोज से संबधित वस्तु आभास होता है ,वह उधर मुड़ जाता है। उस खोज के कारण वहContinue reading “खोज”

इंतजार

तेरा इंतजार करते करते ही तो मेरा वक्त गुजरता है तेरे बेसब्र नयनों ने कभी देखे हैं रास्ते जिनके, उनके घावों पर मरहम भी नहीं, क्या अब इंतजार का हक भी नहीं मुझको। अब आग भी धधक के बुझने वाले है, क्या अंतिम दीदार भी नहीं मुझको। यूं तो बेरुखी की भी हद होती है,Continue reading “इंतजार”

बर्दाश्त

बहुत कुछ झेला है देश ने अब बर्दाश्त नहीं कर पाता हूं, ऐ भारत माता तू कहे तो , अब डंडा लेके चलता हूं। लूटता आया है कई सदी से, अब लूटने को क्या खाक रहा रहम रहम के चक्कर में रहमोकरम पर ही छोड़ा क्या कम थी पहले परेशानी , जो तुमने और बढ़ाई।Continue reading “बर्दाश्त”

यात्रा

अनवरत चलने वाला यात्रा है ये बस इक पराव से मोह किस हद तक उचित है। हर बार की तरह इस बार भी जाना तो पड़ेगा ही। अपनी छोटी बड़ी सोच से उपर उठना तो होगा ही। रात कितनी भी गहरी क्यों न हो सवेरा तो होगा ही। तेरे चैतन्य में प्रकाश तो फैलेगा ही।Continue reading “यात्रा”

सावधान आप सड़क पर हैं।

सावधानी हटी दुर्घटना घटी। या ये कहें नजरे हटी दुर्घटना घटी। सड़क पर चलते समय केवल आपका ठीक होना मायने नहीं रखता, आप यातायात के नियमों का पालन करते हैं,लेकिन आपने सावधानी नहीं बरती,या नजरे बराबर नहीं रखी तोदुर्घटना स्वाभाविक रूप से होगी। क्योंकि केवल आपका नियमों का पालन करना,आपको दुर्घटना से बचा नहीं सकता,Continue reading “सावधान आप सड़क पर हैं।”

कठपुतली

अब उसकी बातों में आकर अचानक उसने अपना इरादाबदल लिया। विभिन्न तरह के बातों को सुनते सुनते वह सत्य से दूर होता चला गया। अब उसके लिए ये कठिन है सही और ग़लत को अलग करना। सत्य और असत्य दोनों से अनजान है। अब उसके फैसले उसके नहीं है। ना उसका खाना उसका है ,Continue reading “कठपुतली”

चांद

चांद को देखा मैंने झुरमुट से निकलते , कभी इधर से तो कभी उधर से झांकते। कभी बादलों में छिपते ,कभी आसमां में खिलते।कभी इतराते तो कभी,बादलों कि सवारी करते।चांद को देखा मैंने झुरमुट से निकलतेकभी इधर से तो कभी उधर से झांकते।कभी रात को सुलाते ,कभी खुद ही सो जाते।कभी तनहाई में,कभी तारों काContinue reading “चांद”

मझधार

क्या लिखूं ए जिन्दगीमझधार में हूंदिल को तलाश हैबेकरार भी हूं।दिल अनजान है,उदास भी हूं।कभी कभी तो ऐसा सोचता हूं।बदल दूं अपनी फितरत को पर,कुछ ही पलों में फितरत अपना रंग दिखाता है, औरमैं फिर से मैं हो जाता हूं। कभी कभी राज से पर्दा हटते हटते, राज और गहरा हो जाता है ।हमको लगताContinue reading “मझधार”

सुकून

ए मेरे दिल के सकून,मैं तुझसे क्या उम्मीद करूं,इस बिगड़ती माहौल में,तेरे साथ चैन से रह पाऊंगा।या तू भी साथ छोड़ देगा,मेरे ख्वाब की तरह।तुझे खोने के डर से छिपता फिरता हूं।और तू जाने को तैयार है,मौसम की तरह।