शरारत

उसके नजरों की शरारतअब बढ़ने लगी है। बात कुछ नहीं थी ,बात बढ़ने लगी है। दिल का बोझ अब धीरे -धीरउतरने लगा है। उसके नजरों की शरारतअबबढ़ने लगी है। नींद आंखों की अब आंखोंसे जाने लगी है। रात रात भर जाग के दिलमचलने लगा है। उसके नजरों की शरारत अबबढ़ने लगी है। दिल की बैचैनीContinue reading “शरारत”

अबोध

अल्प ज्ञानी ,कुछ ना मानी।कुछ सही कुछ ग़लत पैमानी।। ना दिन ना रात जानि।अल्प बोधी वयक्त अभिमानी।। शोभा सुंदर की बात बेईमानी।अक्खर पक्कर सब सहानी।। तृष्णा कृष्णा घोर माया। ना ममता ना देही काया।। रस रंग सब उपज की खानी।मन में बसे दिल में नाही।दिल में बसे सब जगह पांही।।। अनहद नाद सुवाद सबे ओर।जिनContinue reading “अबोध”

चुटकुले

मैं घंटे भर से तुम्हे समझा रहा हूं और तुम्हारी समझ में बात नहीं आ रही है! तुम्हारे दिमाग में गोबर भरा है। जब आपको पता है तो उसे घंटे भर से चाट क्यों रहे है? पिता अपने बच्चे से – बेटा तुम्हे कितनी बार समझाया है कि वह सचमुच का शेर नहीं तस्वीर हैContinue reading “चुटकुले”

दिल चाहता है

मैं सोचता हूं कुछ लिखूं तेरे बारे में ये दिल है कि छुपाने को कहता है। मैं चाहता हूं कि चिल्ला के कहूं सबसे ये दिल है कि चुप रहने को कहता है। मैं चाहता हूं हल्का हो दिल के बोझ ये दिल है कि बोझ ढोने को कहता है। मैं चाहता हूं ये गमContinue reading “दिल चाहता है”

अंतकाल

जब उम्र बिता भाई तब जाके अकल आई। क्या खोया क्या पाया क्या सारी उम्र गंवाया। आज तुझे पता चला तेरी हैसियत कुछ नहीं। जब आई हलक में जान तब तुझे ,सुझे आसमान। तुझे दिया जिन्दगी तू समझा दिल्लगी। कोई खेल में लागा कोई मौज में लागा। जब आई तेरी बारी तू होश में जागा।Continue reading “अंतकाल”

कृष्ण – सुदामा

जब जहां की सारी हदें पार कर लो, दुनिया की सारी इम्तहान पास कर लो, जब तेरे पास कोई मंजिल ना बचा हो तूने सारी मंजिलें पा ली हो, जब ये दुनिया के गम तुझे सताने लगे जब निराशा तुझे घेरने लगे हो, तब मुझे याद करना मेरे दोस्त। तब मुझे याद करना मेरे दोस्त।Continue reading “कृष्ण – सुदामा”

सच

“सच अगर सच्चा है, तो उसे चीखना क्यों पड़ता है।”Ps pooja बेजुबान शब्द आपके इस पोस्ट पर मेरे कुछ विचार। इसको हम अपने समझ से शेयर कर रहे हैंसब के सोचने का नजरिया अलग हो सकता है।सच में हम इसको ऐसे समझ सकते है ।सच की उम्र कितनी है?अगर सच बच्चा है तो उसे चीखनाContinue reading “सच”

कीमत

समय एक ऐसा पल है जिसको गुजरना ही है,ये हम सब जानते है।फिर भी वक्त गुजरने के बाद हम हाथ मलते रह जाते है।और वक्त रहते हम कोई काम नहीं कर पाते और हमेशा सोचते है वक्त बहुत है लेकिन समय बहुत तेजी से बदल रहा होता है। सेहत – ऐसी ही हालात हम अपनीContinue reading “कीमत”

छायावाद

हिंदी में छायावाद हिंदी के विकास के क्रम में छायावाद का विकास द्विवेदी जी के कविता के पश्चात हुआ। अगर मोटे तौर पर देखे तो छायावादी काव्य की सीमा 1928 ई. से 1996 ई.तक मानी जा सकती है। छाया वाद के संदर्भ में आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने कहा है , ” छायावाद शब्द का अर्थContinue reading “छायावाद”