जिन्दगी

जिन्दगी के इस इम्तहान में कौन जीतेगा कौन हारेगा?
पर मजा तो उसे ही आएगा जो किनारे पे बैठ के देखेगा।

रोक लो खुद को कुछ भी कहने से पहले,
आज उसकी तो कल तेरी भी आनी है।

जिन्दगी में सब्र का क्या मोल है,

ये तो उसी को पता है ,जिसने सब्र कर रखा है।

जिन्दगी सबक सिखाने में ,समय का साथ देती है,
अरे ! तू नहीं समझा तेरा इम्तहान लेती है।

जिन्दगी की सच्चाई को उसी ने जाना है,
जिसने अपने आप पे काबू कर पाया है।

वक्त हर समय चलता ही रहता है,

बचपन को लेकर चलते हैं, और

बुढ़ापा आ ही जाता है।

कभी कभी ऐसा लगता है ,वक्त ठहर सा गया है,
लेकिन ये वक्त नहीं ,अपनी सोच है ,यारों।

तू लाख दुहाई दे वक्त को ,
ये वक्त है ये बदलेगा , जरूर।

जिन्दगी उसी की है जिसने ये जाना है ,

कल पर छोड़ना नहीं अपने आज को।

और अंत में

कुछ अच्छे कार्य करने के लिए,

समय मत देखो, यारों,नहीं तो,

तू सोचता ही रह गया और तेरा समय आ गया ……..

Published by Ajab gjab

मैं राइटर रीडर ब्लॉगर और थिंकर भी हूं धन्यवाद

2 thoughts on “जिन्दगी

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