जिद

गुस्से में आकर उसने अपना घर छोड़ तो दिया ,लेकिन
ना तो उसको बोलने का सलीका था, और ना ही वह सीधा मुंह किसी से बात करता था।
सभी कहते थे मा बाप के लाड प्यार ने उसको बिगाड़ दिया था।
घर से बाहर वह अकेले पहली बार निकला था, उसके मन में गुस्सा भरा था ।
और वह बिना कुछ सोचे समझे चला जा रहा था।

उसके घर से निकलते वक्त उसके जेब में एक हजार रूपए मात्र थे।
रास्ते भर सोच रहा था मुंबई जाऊंगा ,मगर उसके पास पैसे बहुत कम थे,
इससे पहले वह अपने मां और पिताजी के साथ मुंबई और कोलकात्ता घूमने गया था , जिससे उसको इतना तो पता था कि मुंबई महगां शहर है, और कलकत्ता सस्ता शहर है।

इसलिए उसने कोलकात्ता जाने का निश्चय किया , और कोलकात्ता का टिकट लेकर ट्रेन में बैठ गया।
कोलकाता पहुंचने पर कुछ दिन इधर – उधर भटकता रहा। दिन और रात को किसी सस्ते से ढाबे पर जाकर खाना खाता और किसी मंदिर के पास या किसी रेलवे स्टेशन पर जाकर सो जाता। पैसे अब ख़तम होने वाले थे ,
और अब उसे अपने घर की याद आने लगी थी। मां और पिताजी की याद आने लगा था।
लेकिन जब जब घर की याद आती तब तब उसे अपने फैसले की याद आ जाती ,की वह क्या कहकर घर से निकला है ,की वह अपने पैर पर खड़ा होकर आएगा,
या तो नहीं आएगा ।

अपनी ही जाल में खुद उलझ चुका था,
कोई काम जानता नहीं था।
अब करे तो क्या करे?
उसने सोचा बिना काम किए तो अब जीना भी मुश्किल हो जाएगा।
इसलिए उसने कुछ भी काम करने की ठानी,
और निकल पड़ा काम की तलाश में,
हर तरह के दुकान में गया ,लेकिन बिना गारंटी के कोई भी काम देना नहीं चाहता था।
अब उसके जेब में मात्र 100 रुपए बचे थे जिसमे ना तो वह घर जा सकता था और ना ही दो दिन से ज्यादा खाना खा सकता था ,आज सुबह वह काम की तलाश में बिना खाए ही निकल गया , लेकिन काम नहीं मिला, दिन के 12 बजे तक उसने काम के तलाश में इधर – उधर हाथ पैर मारता रहा ,लेकिन कोई काम नहीं मिला ,अब उसने सोचा जब तक पैसा कमाना शुरू नहीं कर दूंगा , खाना नहीं खाऊंगा।
दोपहर में उसने पानी पी कर काम चलाया।
और फिर काम की तलाश में लग गया, एक जगह काम मिला भी लेकिन वह काम उसके वश का नहीं था,
बहुत ही भारी गट्ठर को उठा कर एक जगह से दूसरे जगह पर रखना था।
दूसरा दिन भी ऐसे ही गुजर गया था ,बिना खाए एक दिन गुजर गया ,सुबह हुई पानी पीकर फिर काम के तलाश में निकल गया,
आज तो किसी भी हाल में उसको काम ढूंढना था, क्योंकि काम से पैसा मिलेगा तब तो उससे खाना खाएगा, उसकी भूख से हाल बेहाल था ।
उसे बार बार अपने परिवार की याद आती की कैसे खाना में थोड़ा सा भी देरी नहीं होता था, और थोड़ा भी देरी होने पर सब उसको मनाने में लग जाते थे।
आज उसे पूरे एक दिन हो गए थे।
खाना खाए ,लेकिन कोई पूछने वाला नहीं था।
काम की तलाश करते करते वहबहुत दूर निकल चुका था ,
दोपहर हो चुकी थी ,अब भूख और प्यास और जोर से लगने लगी ।
वह छायादार जगह की तलाश करने लगा जहां उसको पानी के साथ आराम करने की जगह भी मिले ,ऐसा ही जगह उसको मिल भी गया वह आम और नींबू का बागान था , वहीं पास में चापाकल था, वहीं उसने पानी पिया और आराम करने लगा,
और भी आदमी वहां आराम कर रहे थे ,उस छायादार जगह में
आपस में बात चीत भी कर रहे थे
वहां नींबू भी बिक रहा था ,आम भी बिक रहा था
नींबू और आम वहां बहुत ही सस्ते में मिल रहे थे,तभी उसके मन में ख्याल आया कि क्यों न इसको बेचने का काम किया जाए ,
लेकिन उसके पास मात्र 100 रूपए ही थे ,दोनों के दाम पता करने पर नींबू बहुत सस्ता लगा ,शहर में 10 का 2 देता है
और यहां 10का 10 उसने सोचा नींबू ही खरीदा जाए , और शहर में बेचा जाए।
इतना सोचने के बाद वह नीबू वाले के पास गया और नींबू का दाम करने लगा पहले तो नींबू वाले को लगा ,
की 1या 2 खरीदेगा ,जब उसने कहा 100 लूंगा तो कहा ठीक है ,75 पैसे का 1 लगा दूंगा ।
इस पर वह मान गया,
और एक प्लास्टिक का बैग भी दे दिया और उसमे 100 नींबू भर दिया , भूख के कारण उसको चला भी नहीं जाता था ,लेकिन उसने मन में ठान लिया था जब तक पैसा कमाऊंगा नहीं खाऊंगा नहीं ।

उसके भूख ने उसको बेचना सीखा दिया ,नींबू बेचने में उसने अपनी पूरी ताकत झोंक दी।
पूरे दिन घूम घूम कर उसने 99नींबू बेच दिए
वहां लोग 10 में 2 देते थे और ये 10 में 3 देने लगा। रात तक उसने लगभग सारे नींबू को बेच दिया।
इस तरह उसने अपने जिन्दगी की पहली कमाई की ,जिसमें उसको फायदा भी हुआ 75 का 333 रात को उसने खाना खाया , और अगले दिन के लिए योजना तैयार करने लगा ,की कल उसको क्या करना है,
दूसरे दिन वह सवेरे वहां नींबू लेने पहुंच गया ।
आज वह 150 रूपए का नींबू का खरीदा 200 जिसमें 100 नींबू सुबह से दोपहर तक और बचे नींबू दोपहर को खाना खाने के बाद रात तक घूम – घूम कर बेच दिया। इस बार भी उसको फायदा हुआ फिर अगले दिन वह लग गया काम में
इस बार वह सुबह से ही नींबू बेचने लगा शाम तक उसने लगभग पूरे नींबू को बेच दिया आज भी उसको 4 गुना से जायदा का फायदा हुआ।
अब उसको थोड़ा – थोड़ा भरोसा अपने उपर होने लगा था। की वह अब कुछ कर सकता है।

अब उसने 10 दिन तक रोज जगह बदल बदल कर नींबू बेचा।
अब उसके पास कुछ पैसे जमा हो गए थे, और कुछ जान पहचान भी हो गई थी , जिसके वजह से उसको रहने के लिए खोली मिल गई।
इस तरह से रोज वह मेहनत करने लगा कुछ दिनों के बाद उसने एक ठेला ले लिया और अब उसने नींबू के साथ खेत से कुछ ताजी सब्जी भी रखने लगा ….…………..

Published by Ajab gjab

मैं राइटर रीडर ब्लॉगर और थिंकर भी हूं धन्यवाद

5 thoughts on “जिद

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