अपनापन

।कोई बांझ तो कोई कुलटा और कोई अभागी कहकर बुलाती थी।कोई कहती सुबह सुबह किसका मुंह देख लिया,आज तो पूरा दिन ही खराब जाएगा।
घर से निकलना मुश्किल कर दिया था,किसी भी वजह से घर से बाहर जाना होता तो सबसे बचके निकलती ,फिर भी कोई ना कोई टकरा ही जाती और उसको ताना सुनना पड़ता इसलिए वह घर से ना ही निकलती थी।
अचानक क्या हुआ ऐसा की समाज के रंग बदल गए?

शादी के करीब दस सालों के बाद उसके घर में किलकारी गूंजी
उसके घर एक सुंदर बच्चे का जन्म हुआ, आखिरकार भगवान ने उसकी और उसके परिवार की सुन ली।
बच्चे के जन्म से पूरा परिवार खुश था।
मां तो अपने बच्चे को देख -देख कर निहाल हो रही थी ।
बीच बीच में उसे अपना बिता हुआ कल भी याद आ जाता था
इक पल में अभी मिली खुशी के आंसू और दूसरे पल में पीछे हुए दुखों के याद में आंसू,
ये आंसू थे कि रुकने का नाम नहीं ले रहे थे, पूरा परिवार उसको चुप कराने में लगा था। कभी कभी पूरा परिवार उसके साथ रोने लगता था ।अपने पूरे परिवार को रोता देख उसने अपने आप को किसी तरह चुप किया । और अपने परिवार के बारे में सोचने लगी ।आज अगर उसका परिवार उसके साथ नहीं होता तो वह मर गई रहती समाज के तानों से उसने कई बार अपने आप को मारने की कोशिश की
उसके परिवार ने उसको बार बार समझा कर उसको अपनेपन का अहसास कराया और उसको हिम्मत दिया। और इसलिए आज सभी लोग उसे बधाई दे रहे थे। जो कल तक ताना मारते थे ,वो भी आज घर आकर बधाईयां दे गए

प्रेरणा :-१) धैर्य हर परिस्थिति में रखना जरूरी है।

२) समाज का क्या है अगर आप कुछ करते हो तो भी बोलेंगे,
और कुछ नहीं करोगे तब भी बोलेंगे। समाज को तो बस समझने की देरी है ।अगर आप गलत करते हो तो भी बोलेंगे ,अगर आप सही करते हो तो भी बोलेंगे ,अगर आप कुछ अचीव करोगे तो सेलिब्रेट करने भी आएंगे।नहीं बुलाओगे तो भी बोलेंगे ,बुलाओगे तो भी बोलेंगे।

३) परिस्थिति कैसा भी हो परिवार अगर साथ दे तो किसी भी मुसीबत से पार पाया जा सकता है।

Published by Ajab gjab

मैं राइटर रीडर ब्लॉगर और थिंकर भी हूं धन्यवाद

5 thoughts on “अपनापन

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