मां

तेरी बातें तेरा प्यार मां मैं न भुला पाता हूं,
अकसर अकेले में छुप- छुप के रोता रहता हूं।
तू है तो जहां मेरे लिए बस खेला है
तू नहीं तो ये दुनियादारी झमेला है।
तेरे रहने से ना जाने कहां से आती है इतनी ताकत !
तेरे इक जाने के अहसास से खुद को अकेला पाता हूं।
तेरी बातें तेरा प्यार मां मैं न भुला पाता हूं।
अकसर अकेले में छुप -छुप के रोता रहता हूं।
मेरे इक जिद के लिए ,
अपने वर्षों के जमा पूंजी को एक पल में लुटाती हो ।
मां मैं कितना भी बड़ा क्यों न हो जाऊं ,तेरे लिए तो तेरा छोटा बच्चा हूं।
तेरी बातें तेरा प्यार मां मैं न भुला पाता हूं।
अकसर अकेले में छुप- छुप के रोता रहता हूं।

परछाई

ढलते सूरज को देखती है और वो फिर चलने लगती है ,उसके चाल में अजब खामोशी और तेजी है। अपने बच्चे को गोद में उठाए पसीने से लथपथ चली जा रही है।कभी अपने छोटे बच्चे को गोदी में संभालती और कभी अपने आंचल से पसीने को पोछती और फिर तेजी से चलने लगती ।
अचानक किसी ने पीछे से आवाज लगाई , मां उफ्फ! धीरे धीरे चलो न, मैं इतना तेज नहीं चल पा रहीं हूं।
मां ने उसकी बात को अनसुना किया और तेजी से आगे बढ़ने लगी ,उसके पीछे बच्ची जो सही से चल नहीं पा रही थी। मां की तेजी देख कर वह उसके पीछे दौड़ने लगी।

Published by Ajab gjab

मैं राइटर रीडर ब्लॉगर और थिंकर भी हूं धन्यवाद

4 thoughts on “मां

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