रुक मत

हम चलते है बिना थके ,

कभी धूप में कभी छांव में ।

हम चलते है बिना थके,

कभी धूप में कभी छांव में

हमें रोकते ये जहां, हमें टोकते है ये जहां।
फिर भी हम चलते है बिना रुके,

कभी धूप में कभी छांव में।

कभी धूप में कभी छांव में।

क्योंकि भविष्य हमें है देख रहा
और है हमसे ये कह रहा
पथ पर कांटे हो चाहे लाख बिछे।
तू रुक जाना नहीं, तू झुक जाना नहीं।
तू संभल के चल ,तू देख के चल
क्योंकि तेरा जिन्दगी है चलना ।

इसलिए तो हम चलते है बिना थके

कभी धूप में कभी छांव में।

कभी धूप में कभी छांव में।

हमे रोकती है वक्त का ये फासला,
हमें रोकती है उम्र का ये सिलसिला।
हमें रोकोगी तुम भी कभी ना कभी,
क्योंकि तुम्हें डर है मेरे हारने का मेरे रुकने का।
और मुझे हौसला है जीतने का, और मुझे हौसला है जीतने का।
अरे तुम ही क्या ? मुझे रोकेगा ये वक्त भी ,
मुझे रोकेगा ये जहां भी ,
ऐसा होता है हर कर्मपथ पर चलने वाले के साथ भी।
मगर जो चलता रहता है वो है जीतता , मगर जो चलता रहता है वो है जीतता।

इसलिए हम चलते है बिना थके
कभी धूप में कभी छांव में,
कभी धूप में कभी छांव में।

जिन्दगी का धुंध ये जिन्दगी के मायने
हमें पता करते है जाना , हमें पता करते है जाना।
क्योंकि कब अंत हो मेरे पथ का
ये मैंने नहीं जाना ,क्योंकि कब अंत हो मेरे पथ का ये मैंने नहीं जाना ।
अभी तक मैंने जो है जाना रुक जाना है मर जाना और
खो जाना है उस बिराने में जहां से न है किसी का आना।
इसलिए हमको चलते जाना है ,
बस चलते जाना।
इसलिए हम चलते है बिना थके
कभी धूप में कभी छांव में ।

कभी धूप में कभी छांव में।

चाहे तेरे रास्ते में आये लाख तुफां,

चाहे तुझे झुकाने को ,तुझे अपने पथ से डिगाने को, आसमां ही क्यों न उतर जाए, तू रुकना नहीं तू झुकना नहीं ।
तेरे चलने पर ही तो है तेरा भविष्य टिका ,
जब तक तू चलेगा तेरा साथ देने हो सकता है कोई ना आए ,
मगर तेरे चले रास्ते पर हर कोई चलेगा ,
मगर तेरे चले रास्ते पर हर कोई चलेगा।

इसलिए हम चलते हैं बिना थके

कभी धूप में कभी छांव में।

कभी धूप में कभी छांव में।

नाव

नाव हिलती डुलती है पर मंजिल की ओर अग्रसर रहती है।

नाव हिलती डुलती है पर मंजिल की ओर अग्रसर रहती है।
पर पतवार किसी और के हाथ में
नाव के अंदर है सवारी बहुत पर मंजिल सब की एक है।
जाना है सबको उस पार,
मगर नाव का तो काम है ढोना
उसे किस बात का रोना ।
ना उसके अपने कोई, ना कोई पराया
ना कोई हमसफ़र, ना कोई साया
सारा संसार बस है माया,
नाव का तो काम है बिना रुके मंजिल तक पंहुचना ।
अगर नाव रुक गया तो रुक जाएगा उसके साथ बहुतों का सफर ।हो सकता है अंत हो जाए ये सफर सुहाना।
मगर नाव रुकता नहीं चलता रहता अपने पथ पर।
लहरें उसको डगमगाती है
कभी आगे कभी पीछे गिराती है
कभी जीतती है कभी हार जाती है।
पर अपने काम को छोड़ नहीं पाती है
नाविक जब थक कर सो जाता है नाव में वह धीरे धीरे उसको सहलाती है

Published by Ajab gjab

मैं राइटर रीडर ब्लॉगर और थिंकर भी हूं धन्यवाद

4 thoughts on “रुक मत

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