वो कौन थी

Vo kaun thi

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रात के अंधेरे में हम जा रहे थे

रात के करीब 11बजे थे।
उल्लू की आवाज सन्नाटे को भंग कर रही थी।
मक्खियां जो दिन भर इधर उधर करती  है उनका कहीं नामो निशान नहीं था ।

दिन में जो रौशनी हर तरफ फैली रहती है रात में वो भी चैन  की नींद में खो जाती है जैसे की रौशनी का कोई वजूद ही नहीं हो।


दूर दूर तक कोई इंसान नजर नहीं आ रहा था
पूरा रास्ता सुनसान था ।
और हम चले जा रहे थे मस्ती में
अंधेरे को चीरते हुए। अंधेरा ऐसा की अंधेरे में अपना हाथ तक नजर नहीं आता था ।
कि अचानक लगा कि मेरे सामने से कोई तेजी से निकल गया  हो और मैं  सन्न सा अंधेरे  में देखने कि कोशिश करने लगा ।बार बार मन में ख्याल आने लगे   कि कोई तो आगे से निकला है और अचानक उल्लू के भयानक आवाज से मैं घबरा गया । घबराने के बावजूद मैंने चलना नहीं छोड़ा , मैं किसी तरह उस जंगल को जल्दी जल्द छोड़ना चाहता था लेकिन जंगल था कि खत्म होने का नाम नहीं ले रहा था।
में अंदर से डरता एवम्  सोचता हुआ आगे बढ़ ही रहा था कि

ऐसा लगा कि किसी ने मेरा पैर पीछे से पकड़ लिया हो!!

अचानक हुए इस हमले से मैं बहुत डर गया ।

मेरा पूरा शरीर पसीने से लथपथ हो गया मेरा शरीर  डर से कांपने लगा और अब लगने लगा कि मैं गिर कर बेहोश हो जाऊंगा की अचानक किसी ने कान में कहा जरा नीचे तो देखो उसकी आवाज में जादू था ।उसके आवाज के जादू ने मुझे नीचे की ओर देखने पर मजबुर कर दिया तो मेरी नजर अचानक नीचे गई और मैं आश्चर्य से भर गया।

मेरा पांव कोई पकड़े नहीं था बल्कि मेरे पांव में कोई प्लास्टिक लिपटा है ।
जो मुझे आगे जाने से रोक रहा था अब जाके मेरे जान में जान आई ।
और मैं तेजी से उस रास्ते को पार करने लगा जब मैंने रास्ते को पार कर लिया तब जाके मुझे याद आया कि किसी ने मेरे कान में कुछ ? अचानक मेरा ध्यान उस बात की तरफ गया।
तो फिर एक बार डर और आश्चर्य से मैं सोचने लगा आखिर कौन थी ? उसके बातों का जादू उफ्फ मुझे सोचने पर मजबुर कर दिया और सोचते सोचते मुझे अपने आप पर ग्लानि   होने लगी ।

मैं अपने आपको कोस रहा था कि मैं कितना डर गया था ।

मैंने फिर उस जगह पर जाने का निर्णय किया।जहां उसकी आवाज मेरे कानो में गूंजी थी। लेकिन मन था कि जंगल के उस अंधेरे को बार बार याद कर रहा था।

इस बार मैं हिम्मत करके अपने साथ हुए घटना को याद करने लगा ।
   मन ही मन में अपने आप पर हंसने लगा ।
तो क्या मैं उस रास्ते पर फिर चल कर देखूं ,
मन ने अंदर से आवाज दिया

या अभी इतनी रात में वहां जाना खतरनाक होगा ? तो वो वहां रात के घने अंधेरे में क्या कर रही है।
और मैं बिना जाने वहां से कैसे चला आया
ये सब सोचता हुआ मैं अपने पैर को रोक नहीं पा रहा था जैसे कोई अज्ञात शक्ति मुझको अपने ओर खींच रही हो  और  एकबार
फिर से  मैं  उसी रास्ते पर था!!!!!!!

वो कौन थी ?क्या मैं उसके बारे में जान पाया ?क्या मैं उससे मिल पाया ? आखिर उसने मेरी मदद क्यों की? ये सब जानने के लिए पढ़े वो कौन थी पार्ट 2

अगर आपको कहानी अच्छी लगती है तो please comment

Published by मनवीर

मैं रीडर और थिंकर हूं धन्यवाद

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