पिंजरा

बंद पिंजरा तोड़ के पंछी ,
उड़ जायेगा सब कुछ छोड़ के।


ना तेरा ना मेरा ,ना ही रेनबसेरा,
सारे रिश्ते नाते तोड़ के पंछी,

उड़ जायेगा सब कुछ छोड़ के ।


ना कोई राजा ना कोई रानी ,
जीवन की है यही कहानी,


तुमको यहीं पर छोड़ के पंछी
उड़ जायेगा सब कुछ छोड़ के।


तिनका – तिनका जोड़ के महल बनाया,
रिश्तों नातों से सजाया,


सारी दुनिया छोड़ के पंछी,
उड़ जायेगा सब कुछ छोड़ के।

बंद पिंजरा तोड़ के पंछी ,
    उड़ जायेगा सब कुछ छोड़ के।

आजादी

इस फरेबी संसार से तू
ऐसे मत जुड़ जाना

जब आए तेरी आजादी
उड़ना मत भूल जाना।
जिन्दगी की इस दौड़ में

संतुलन बनाए रखना ,या बड़ा बनके

खुद को खुदा मत समझना,
जब आए तेरी आजादी

उड़ना मत भूल जाना।


आग भी राख होती है ,

जिन्दगी के भी शाख होते है,
शाखों में उलझ कर खुद को हराभरा न समझना।


जब आए तेरी आजादी

उड़ना मत भूल जाना।


तेरा किरदार तुझे निभाना है
ये जीवन को जी के जाना है,


अपने किरदार में खुद को ना भूल जाना,
जब आए तेरी आजादी

उड़ना मत भूल जाना।
ये जीवन का पहेली ,

उलझाना इस का काम।
इस जीवन के पहेली में

तुम ना उलझ जाना,
जब आए तेरी आजादी

उड़ना मत भूल जाना

जिन्दगी

कितनी अरमानों से निकली
तू।


कितनों अरमानों से खेली
तू।


ऐ जिन्दगी जीने के लिए
क्या – क्या नहीं झेली
तू।


अपनों से अनजानों तक
शहर से विरानों तक,
क्या – क्या मंजर ना देखी
तू।


कभी तन्हाई में ,कभी महफ़िल में,
जाने क्या – क्या पापड़ बेली
तू।


कभी तूफानों से ,कभी अरमानों से,
ना जाने कितनों की जिन्दगी से खेली
तू।

कितनी अरमानों से निकली
तू।

कितनों अरमानों से खेली
तू।


ऐ जिन्दगी जीने के लिए
क्या – क्या नहीं झेली
तू।

कभी पत्थरों के शहर से, कभी बागों से,

जाने किस – किस मुकाम से गुजरी
तू।

मेरे विचारों ,मेरे जज्बातों ,मेरे वसूलों से फिसली

तू

कितनी अरमानों से निकली
तू।

कितनों अरमानों से खेली
तू।

ऐ जिन्दगी जीने के लिए
क्या – क्या नहीं झेली
तू।

इंतजार

इंतजार बस इंतजार तेरा ,
        तू है बस, तू ही है प्यार मेरा।

इस जहां को भी तेरी चाहत है,
        तू आएगी ये वक्त का इशारा है।

आईने सोच सोच संवरे है,
        तेरी आने की जो आहट है।

इंतजार बस इंतजार तेरा,
        तू है बस  तू ही है प्यार मेरा।

अब तो दिन भी रात लगता है,
        तेरी प्यारी मिलन की जो चाहत है।

आओ ना अब आ भी जाओ,
       इस दिल को  ना तरसाओ,
               ना तरसाओ।

बरखा बरस बरस के तुझे बुलाए,
        ये दिल धड़क धड़क तुझे पुकारे।

इंतजार बस इंतजार तेरा,
        तू है बस तू ही है प्यार मेरा ।

जाने किस दुनिया में तू खोई है ,
        मैं तुझे  खोज – खोज बस खोज रहा ।

इंतजार बस इंतजार तेरा,
        तू है बस तू ही है प्यार मेरा।

पत्थरों का शहर

अपने शहर में बेगानों सा रहता हूं,

ये हमारी उलझन है या उलझने आम है।

काम तमाम रहता है बोझ बनके ,
या जिन्दगी बोझिल सी लगती है।

अपने पराए हुए लगते है, अब तो,
लगता है, पत्थरों के शहर में रहते है।

जान जो देते थे एक – एक बात पर मेरे लिए
आज वो भी नकाव में चलते है।

रात को दिन का रोना ,दिन को रात का रोना

ये सूरत मेरी है या सूरत ए आम है।

चलना मत छोड़

रास्ते कितने भी कठिन हो,
       चलना मत छोड़ ,चलना मत छोड़।

बात – बात में ही बात बढ़ती है,
       बूंद – बूंद ही तालाब भरती है।

इक – इक इंट से ही घर बनता है,
        छोटे – छोटे पग ही बड़ी मंजिल तक           
         पहुंचाती है।

इसलिए रास्ते कितने भी कठिन हो,
        चलना मत छोड़ ,चलना मत छोड़।

पांव के नीचे आएंगे कभी फूल तो कभी कांटे भी    
         इन छोटी – मोटी दुश्वारियों से डर के

         चलना मत छोड़, चलना मत छोड़।

राह में आएंगे कभी ऊंचे पहाड़, कभी गहरी खाई भी,
        मंजिल  दूर समझ के,

  चलना मत छोड़ ,चलना, मत छोड़।

हौसले बुलंद रख, दिमाग में ठंड रख,
         आने वाली परेशानियों से डर के,

चलना मत छोड़, चलना मत छोड़।

अनजान नहीं है ये जहां तेरे लिए, तूने कई वार पग रखे यहां ,
अनजानी राहों को देख कर।

चलना मत छोड़ ,चलना मत छोड़।


तेरी हिम्मत तेरा गवाही देगा,
तेरे बनाए रास्ते पे दुनिया चलेगी,
ना अपने लिए सही ,दूसरों के लिए ही सही

चलना मत छोड़ चलना मत छोड़,

तू कायर नहीं तू वीर है,
   तू धिर है ,गंभीर है।
मैदान में यूं आके लड़ना मत छोड़ ,
    लड़ना मत छोड़।

रास्ते कितने भी कठिन हो,
चलना मत छोड़ ,चलना मत छोड़।

प्यार

आजा थोड़ा आराम कर ले,
      जिन्दगी को थोड़ा प्यार कर ले।

वक्त तो नहीं तेरे पास ,
       लेकिन कुछ तो वक्त निकाल ले।

माना दुश्वारियां है बहुत ,
       पर तुझमें समझदारी भी है बहुत,
              कुछ तो समझदारी दिखा ले।

आजा थोड़ा आराम कर ले,
        जिन्दगी को थोड़ा प्यार कर ले।

मन को थोड़ा शांत कर,
         उससे थोड़ा बात कर।

अपने पीठ को थपथपा,
        खुद को शाबाशी दे ,
                 और हौसला बढ़ा।

आजा थोड़ा आराम कर ले,
        जिन्दगी  को थोड़ा प्यार कर ले।

दिल को दिल से लगा ,
         बात को यूं ना बढ़ा,
                दिल का तू ख्याल कर ले।

आजा थोड़ा आराम कर ले,
          जिन्दगी को थोड़ा प्यार कर ले।

ख़ामोश जिन्दगी

क्यूं खामोश है जिन्दगी ,
     क्या बात है?

हर बात में ठंडी आहें,
     क्या बात है?

रात को तारें गिनना,
    गिनकर यूं मुस्कुराना,
          क्या बात है?

राह चलते – चलते यूं गिर पड़ना,
        गिर कर फिर संभल जाना,
                क्या बात है?

जुबां से कोई बात नहीं निकलती,
        दिल के अरमान दबा के बैठे हैं,
                क्या बात है?

जमाने के दर्द को समेटे बैठे है,
        फिर भी आप ऐंठे बैठे है,
               क्या बात है?

क्यूं खामोश है जिन्दगी ,
        क्या बात है?

हर बात में ठंडी आहें,
        क्या बात है?

हालाते शहर देखकर यूं गुम है,
        जज्बातें दर्द बयां नहीं होता,
              क्या बात है?

खामोशी से हर रास्ते नापता गया,
        ये सफर का थकान,
              क्या बात है?

दर्द से रिश्ता

अब दर्द का दर्द से रिश्ता बन रहा है।

तेरा यूं नजर चुराना मेरे दर्द का सबब बन रहा है।

दिन हो या रात हो बस तेरी ही बात हो।

डूब के दर्द में दर्द से ही इश्क करने लगा हूं।

ये मेरे दिल का भ्रम है या सचमुच तुम हो।

मेरी बातों का हो सकता है
कोई अर्थ ना हो तेरी नजरों में,

मगर मेरी बातों को मैं या मेरा दिल जानता है।

राहत मिलती नजर नहीं आती अब तो,
रह रह के इक हुक सी उठती है।
जाने कब तक ,जाने कब तक

तेरे लिए चाहतों का गुब्बार सा उठता है,
पर तेरी चाहतें भी तो दर्द देके  जाती है।

लाख अनजान बनू तुझसे,
पर तू है कि दिल का दर्द बन के निकलती है।

मनवीर के दोहे

अकल लगा के प्रेम किया
प्रेम समझ ना आए,
प्रेम को जान के प्रेम किया
संसार प्रेममय हो जाय।

सत्य असत्य के फेर उलझा सारा संसार
मनवीर बैठा जानके देखत
सुनत बताए

हमने देखा तुमने देखा
सब नजर नजर का फेर
किसी ने देखा तन को
कोई जाने माया का फेर।

ना बत्ती ना बिछौना
ना धन का कछु होना,
जब उड़ जाए पंछी छोड़ घोसला,
तो किस बात का रोना।

आमद नगद उधारी जीवन
बिन गुरु ज्ञान बेकारी जीवन
खोज मनवीर गुरु को
ज्ञान मिली तर जाई जीवन।

अंधेरे में कछु सुझत नाही
रस्सी से भी घबराई,
गुरु मिले हैं जबसे ,
सब कुछ समझ में आई।

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