इंतजार

मैं पढूंगा तब खाऊंगा,


नहीं बेटा पहले खा ले फिर पढ़ना।


नहीं मैं पढूंगा तब खाऊंगा।


नहीं बेटा रात बहुत हो गई है

तू खाना खा ले फिर मन लगा के पढ़ना,


नहीं मां मुझे अभी और पढ़ना है ,

तू खाना खा ले , मैं खा लूंगा ,

नहीं बेटा मैं इंतजार करूंगी, तू पढ़,


बच्चे के जिद के आगे मां की एक ना चली,


मां बैठ कर इंतजार करने लगी,

समय बीतता रहा ,रात गहराने लगी, लेकिन बच्चा पढ़ाई छोड़ नही रहा था,


और मां बिना खाए बैठी इंतजार कर रही है……….


समय गुजरा बच्चा बड़ा हुआ ,


अब उसके पास सारे ऐशोआराम है ,

पर आज भी मां फोन पे बेटा कब आएगा ,


मां मैं आ जाऊंगा तू खा ले,


नहीं बेटा तू जल्दी आ खाने का समय हो गया ,

नहीं मां अभी मैं बहुत जरूरी काम कर रहा हूं,

तू खा ले ,नहीं बेटा तू आ ,

मैं इंतजार कर रही हूं……

उम्मीद अभी बांकी है

हर हार के बाद.. तेरी जीत अभी बांकी है.. अभी बांकी है..


क्योंकि उम्मीद अभी बांकी है..
उम्मीद अभी बांकी है..


रात गहरी हो कितनी भी ..पर तेरी सुबह … अभी बांकी है ..

सुबह अभी बांकी है..


दर्द सहे है कितने तुमने…
कितने तुमने ..
उन दर्दों का हिसाब अभी बांकी है..
हिसाब अभी बांकी है..


क्योंकि उम्मीद अभी बांकी है..
उम्मीद अभी बांकी है..


तूने सजाए कई सपने है ..
कई सपने है..
इन सपने को पूरा करना बांकी है..
अभी बांकी है..


क्योंकि उम्मीद अभी बांकी है..
उम्मीद अभी बांकी है..

साथ देना हमारा

साथ देना हमारा ,
साथ देना हमारा..


जब आए मुसीबत..2
साथ देना हमारा ….2


अंधेरी रातों में जब ना दिखता हो कुछ भी.. 2,

अंगुली पकड़ना हमारा…2

साथ देना हमारा…2


बैठ जाऊं हार कर, जब कुछ आए न नजर …2

हौसला बढ़ाना हमारा…2


साथ देना हमारा…2


राह कांटो से भरी हो संग कोई ना हो…2


हाथ देना तुम्हारा ….

हाथ देना तुम्हारा…


साथ देना हमारा,
साथ देना हमारा।


जब तुमको लगे …
मैं गलत राह में हूं..2


राह दिखाना जरा सा ,
राह दिखाना जरा सा,


साथ देना हमारा ,साथ देना हमारा…

जीवन चक्र

क्लेश कष्ट करुणा
मरणासन्न बुढ़ापा तरुणा।

लू पेड़ छाया
कंचन काया माया।

सब्र विश्वास मीठा
बेसब्र अविश्वास तीखा।

नायक,जीवन कठिन

जीवन मृत्यु पलछिन्न।

अपमान अनादर प्रतिष्ठा
सत्य कर्म निष्ठा।

अविवेक क्रोध घमंड
अंत प्रलय तांडव।

भय घृणा,तृष्णा
अंत समय सब कृष्ण।

कौन हूं मैं ?

कौन हूं मैं मुझे किसकी तलाश है?


दिन है रात है ,

दिल में जज़्बात है,

फिर भी न जाने क्यों ?


कौन हूं मैं मुझे किसकी तलाश है?


रिश्ते हैं नाते है ,

और प्यार पाते हैं,

फिर भी ना जाने क्यों,


कौन हूं मैं मुझे किसकी तलाश है?


जानी अनजानी राहें है,


सपने ढेर सारे है।


फिर भी ना जाने क्यों?


कौन हूं मैं मुझे किसकी तलाश है?


मृत्यु है अमरता है,

प्रेम है समरसता है।


फिर भी ना जाने क्यों?


कौन हूं मैं मुझे किसकी तलाश है।


अंत है अनंत है, देव है संत है।


जड़ है चेतन है और आनंद है।


फिर भी ना जाने क्यों?


कौन हूं मैं मुझे किसकी तलाश है?

बेखबर

उस बेखबर को ना खबर ही हुई ,


मैं मरने चला वो शहर को चली।


बहुत चाहते थे ,तुमको ए दिल,


ये दिल की लगी है ये मैं ही जानता हूं।


तुमको है क्या ,हंसी तुम बहुत थी,


मेरे दिल को पसंद तुम बहुत थी।


मगर इसी दिल को तुमने धोखा दिया,


तोड़ के मेरा दिल, तूने दिल कहीं और लगा लिया।


आज मेरा दिल फिर छलनी हुआ।


तूने खेला ऐसा खेल दिल जख्मी हुआ,


तेरी करतबों को लोग याद रखेंगे,


तूने जो किया उसे लोग याद रखेंगे।


अब अनजान बन गया तू सब कुछ करके,


तुझे भूल जाएंगे अपना सब कुछ खोके,


उस बेखबर को ना खबर ही हुई ,
मैं मरने चला वो शहर को चली।

बहुत दिन हुए, तुझसे बात हुए, मुलाकात हुए……



आज फिर उस शहर में, मेरा आना हुआ,
उ नकी गलियों में फिर जाना हुआ।


ख़ामोश रास्ते उनकी गालियां थी ,सुनसान
जैसे उनके बिना सब थे वीरान ।


मैं चलता गया, दिल सिसकता रहा,

उनकी मुहब्बत का मैं, बस याद ले चला,


उस बेखबर को ना खबर ही हुई ,
मैं मरने चला वो शहर को चली ।

पिंजरा

बंद पिंजरा तोड़ के पंछी ,
उड़ जायेगा सब कुछ छोड़ के।


ना तेरा ना मेरा ,ना ही रेनबसेरा,
सारे रिश्ते नाते तोड़ के पंछी,

उड़ जायेगा सब कुछ छोड़ के ।


ना कोई राजा ना कोई रानी ,
जीवन की है यही कहानी,


तुमको यहीं पर छोड़ के पंछी
उड़ जायेगा सब कुछ छोड़ के।


तिनका – तिनका जोड़ के महल बनाया,
रिश्तों नातों से सजाया,


सारी दुनिया छोड़ के पंछी,
उड़ जायेगा सब कुछ छोड़ के।

बंद पिंजरा तोड़ के पंछी ,
    उड़ जायेगा सब कुछ छोड़ के।

आजादी

इस फरेबी संसार से तू
ऐसे मत जुड़ जाना

जब आए तेरी आजादी
उड़ना मत भूल जाना।
जिन्दगी की इस दौड़ में

संतुलन बनाए रखना ,या बड़ा बनके

खुद को खुदा मत समझना,
जब आए तेरी आजादी

उड़ना मत भूल जाना।


आग भी राख होती है ,

जिन्दगी के भी शाख होते है,
शाखों में उलझ कर खुद को हराभरा न समझना।


जब आए तेरी आजादी

उड़ना मत भूल जाना।


तेरा किरदार तुझे निभाना है
ये जीवन को जी के जाना है,


अपने किरदार में खुद को ना भूल जाना,
जब आए तेरी आजादी

उड़ना मत भूल जाना।
ये जीवन का पहेली ,

उलझाना इस का काम।
इस जीवन के पहेली में

तुम ना उलझ जाना,
जब आए तेरी आजादी

उड़ना मत भूल जाना

जिन्दगी

कितनी अरमानों से निकली
तू।


कितनों अरमानों से खेली
तू।


ऐ जिन्दगी जीने के लिए
क्या – क्या नहीं झेली
तू।


अपनों से अनजानों तक
शहर से विरानों तक,
क्या – क्या मंजर ना देखी
तू।


कभी तन्हाई में ,कभी महफ़िल में,
जाने क्या – क्या पापड़ बेली
तू।


कभी तूफानों से ,कभी अरमानों से,
ना जाने कितनों की जिन्दगी से खेली
तू।

कितनी अरमानों से निकली
तू।

कितनों अरमानों से खेली
तू।


ऐ जिन्दगी जीने के लिए
क्या – क्या नहीं झेली
तू।

कभी पत्थरों के शहर से, कभी बागों से,

जाने किस – किस मुकाम से गुजरी
तू।

मेरे विचारों ,मेरे जज्बातों ,मेरे वसूलों से फिसली

तू

कितनी अरमानों से निकली
तू।

कितनों अरमानों से खेली
तू।

ऐ जिन्दगी जीने के लिए
क्या – क्या नहीं झेली
तू।

इंतजार

इंतजार बस इंतजार तेरा ,
        तू है बस, तू ही है प्यार मेरा।

इस जहां को भी तेरी चाहत है,
        तू आएगी ये वक्त का इशारा है।

आईने सोच सोच संवरे है,
        तेरी आने की जो आहट है।

इंतजार बस इंतजार तेरा,
        तू है बस  तू ही है प्यार मेरा।

अब तो दिन भी रात लगता है,
        तेरी प्यारी मिलन की जो चाहत है।

आओ ना अब आ भी जाओ,
       इस दिल को  ना तरसाओ,
               ना तरसाओ।

बरखा बरस बरस के तुझे बुलाए,
        ये दिल धड़क धड़क तुझे पुकारे।

इंतजार बस इंतजार तेरा,
        तू है बस तू ही है प्यार मेरा ।

जाने किस दुनिया में तू खोई है ,
        मैं तुझे  खोज – खोज बस खोज रहा ।

इंतजार बस इंतजार तेरा,
        तू है बस तू ही है प्यार मेरा।

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